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उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर कार्रवाई, दो हफ्तों में 52 सील, मुस्लिम संगठनों ने जताया विरोध
शिक्षा का अधिकार हर बच्चे के लिए आवश्यक है, लेकिन जब कोई संस्थान बिना पंजीकरण या अवैध निर्माण के चलते संचालित होता है, तो यह कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर एक गंभीर मुद्दा बन जाता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल ही में की गई कार्रवाई इसी संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है। राज्य में अवैध रूप से संचालित मदरसों को चिन्हित कर सील करने की प्रक्रिया जारी है, जिससे हजारों छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है। इस कदम की मुस्लिम संगठनों ने कड़ी आलोचना की है और इसे असंवैधानिक बताया है, जबकि सरकार का दावा है कि यह कानून व्यवस्था बनाए रखने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने बीते दो हफ्तों में 52 अवैध मदरसों को सील कर दिया है। इनमें से 42 मदरसे देहरादून जिले में और 10 मदरसे खटीमा, उधम सिंह नगर जिले में सील किए गए। इस कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिया गया था, और यह अभियान अभी भी जारी है। सरकार ने इन मदरसों को बंद करने का कारण अवैध निर्माण और बिना पंजीकरण संचालित होने को बताया है।
सरकार द्वारा जनवरी 2025 में मदरसों की पहचान का अभियान शुरू किया गया था, जिसके तहत 419 मान्यता प्राप्त मदरसों की सूची उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने प्रस्तुत की। सरकार का दावा है कि राज्य में लगभग 400 मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। साथ ही, इन संस्थानों की फंडिंग के स्रोतों की जांच भी की जा रही है।
इस कार्रवाई के खिलाफ मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक बताया है। संगठनों का कहना है कि इस फैसले से 2,000 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं, जिनकी शिक्षा अब अधर में लटक गई है। सरकार का कहना है कि इन मदरसों के स्थान पर आधुनिक मदरसों की स्थापना की जाएगी, जहां बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।



