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शिवालिक हाथी रिजर्व में 3,300 पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट की रोक, परियोजना के प्रभावों पर रिपोर्ट तलब
वन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर न्यायालय का हस्तक्षेप देखने को मिला है। सड़क चौड़ीकरण जैसी विकास परियोजनाएं अक्सर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित करती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ता है। उत्तराखंड के शिवालिक हाथी रिजर्व क्षेत्र में भी इसी प्रकार की एक परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण के लिए 3,300 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी, जिस पर अब हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। यह परियोजना भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर प्रस्तावित है, जो हाथी गलियारों (Elephant Corridors) से होकर गुजरता है। याचिकाकर्ता रीनू पॉल ने इस मामले में दायर याचिका में दलील दी कि यह परियोजना एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवासों को नुकसान पहुंचा सकती है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस परियोजना के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत आवश्यक मंजूरी, प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की योजना और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (Environmental Impact Assessment) रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके साथ ही, अदालत ने सुझाव दिया कि हाथी गलियारे को अवरुद्ध करने के बजाय, सरकार को सड़क के लिए फ्लाईओवर बनाने की संभावना तलाशनी चाहिए।
अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च 2025 को निर्धारित की गई है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने अदालत के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे हाथियों के प्राकृतिक आवास की रक्षा हो सकेगी।



