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हेम्प आधारित स्टार्टअप्स से उत्तराखंड में स्वरोजगार को नई दिशा, हरिद्वार में हुआ विशेष कार्यक्रम
हरिद्वार में ‘हेम्प-संभावना से समृद्धि’ कार्यक्रम, औद्योगिक विकास और स्वरोजगार को मिलेगी नई दिशा
हेम्प: एक बहुआयामी फसल जो आर्थिक विकास का माध्यम बन रही है
वर्तमान समय में पर्यावरण-संरक्षण और सतत विकास की दिशा में हेम्प (भांग) को एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। दुनियाभर में हेम्प से बने उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे न केवल औद्योगिक विकास को गति मिल रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में यह फसल किसानों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का एक प्रभावी साधन बन सकती है। इसी उद्देश्य से हरिद्वार जिले के विकास भवन, रोशनाबाद में ‘हेम्प-संभावना से समृद्धि’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में उद्योग एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हेम्प की उपयोगिता पर चर्चा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में हेम्प के औद्योगिक और औषधीय उपयोगों पर चर्चा की गई। बताया गया कि हेम्प से बायोप्लास्टिक्स, कपड़ा, तेल, सौंदर्य प्रसाधन, गलीचे, कागज और हेम्पक्रीट ब्लॉक जैसी चीजें बनाई जा रही हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में विशेष रूप से हेम्पक्रीट ब्लॉक निर्माण किया जा रहा है, जो इमारतों को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाता है। ये ब्लॉक प्राकृतिक रूप से सांस लेने योग्य होते हैं और टिकाऊ निर्माण सामग्री के रूप में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
हेम्प से स्वरोजगार को बढ़ावा, युवाओं और किसानों के लिए वरदान
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि हेम्प आधारित स्टार्टअप्स युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल बेरोजगारी में कमी आएगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। हेम्प खेती के जरिए किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं, जिससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि आ सकती है।

उत्तराखंड की बेटी नम्रता कंडवाल को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड की बेटी नम्रता कंडवाल और उनकी गोहेम्प टीम को हेम्प को नई पहचान दिलाने के प्रयासों के लिए सराहना मिली। बताया गया कि उनका कार्य स्थानीय किसानों को जागरूक करने और हेम्प आधारित उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहायक हो रहा है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर
प्रधानमंत्री के Vocal for Local अभियान के तहत, इस कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और उनके माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हेम्प आधारित उद्योग उत्तराखंड को आर्थिक रूप से और सशक्त बना सकते हैं।
निष्कर्ष: हेम्प आधारित उद्योगों के लिए नीति निर्माण आवश्यक
इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि हेम्प न केवल एक पारंपरिक औषधीय पौधा है, बल्कि यह आर्थिक उन्नति और पर्यावरण संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। यदि राज्य सरकार इस दिशा में ठोस नीतियाँ बनाकर किसानों और उद्यमियों को सहयोग प्रदान करे, तो उत्तराखंड हेम्प आधारित उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।



