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धार्मिक नगरी में भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान, बच्चों को मिलेगा उज्जवल भविष्य
देहरादून में पहली बार आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर, भिक्षावृत्ति मुक्त बच्चों को मिलेगा नया जीवन
क्या भीख मांगने की मजबूरी खत्म होगी?
सड़कों पर मासूम बच्चे हाथ फैलाए दिखते हैं, लेकिन क्या यह उनकी नियति होनी चाहिए? भीख मांगने की कुप्रथा केवल गरीबी की निशानी नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक संकट भी है। ये बच्चे शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए देहरादून प्रशासन ने अभिनव पहल की है।

देहरादून में राज्य का पहला आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर
सूत्रों के अनुसार, देहरादून जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए साधुराम इंटर कॉलेज में राज्य का पहला आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर स्थापित किया है। यह केंद्र बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास, कंप्यूटर ज्ञान और संगीत की शिक्षा प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
तकनीकी और सांस्कृतिक शिक्षा के लिए विशेष प्रबंध
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन्टेंसिव केयर शेल्टर में बच्चों के लिए कक्षा कक्ष विकसित किए गए हैं, जिनमें कंप्यूटर लैब और म्यूजिक रूम भी शामिल हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चे तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति से भी जुड़ें। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है।
प्रशासन का प्रयास, समाज की भागीदारी जरूरी
देहरादून जिलाधिकारी के अनुसार, राज्य सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है। प्रशासन जहां बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के अवसर प्रदान कर रहा है, वहीं समाज की भागीदारी भी आवश्यक है।
क्या यह पहल बदलाव ला सकेगी?
भिक्षावृत्ति से मुक्त बच्चों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाने के लिए यह पहल सराहनीय है। लेकिन समाज की सोच और समर्थन के बिना यह मिशन अधूरा रह सकता है। क्या लोग इस अभियान का समर्थन करेंगे? क्या धार्मिक स्थलों और बाजारों में अब बच्चों को भीख मांगते नहीं देखा जाएगा? यह समय बताएगा, लेकिन एक प्रयास जरूर शुरू हो चुका है।



