Monday, February 16, 2026
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चंपावत में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान, पुलिस-पत्रकारों के बीच खेला गया सद्भावना क्रिकेट मैच

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नशे की लत युवाओं को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर रही है। पहाड़ी राज्यों में भी यह गंभीर समस्या बनती जा रही है, जहां युवाओं के उज्ज्वल भविष्य पर नशे का अंधकार मंडरा रहा है। पुलिस और प्रशासन इस खतरे से निपटने के लिए विभिन्न अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में चंपावत जिले में शामुक्त देवभूमि अभियान के तहत पुलिस और पत्रकारों के बीच सद्भावना क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य खेल के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना था।

पुलिस और पत्रकार आमने-सामने, लेकिन नशे के खिलाफ एकजुट

रविवार को गोरल चौड़ मैदान, चंपावत में पुलिस और पत्रकारों के बीच खेले गए इस विशेष क्रिकेट मैच की शुरुआत पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने खिलाड़ियों को “Say No To Drugs” स्टिकर लगाकर की। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने और सकारात्मक ऊर्जा में लगाने का एक बेहतरीन जरिया है।

मैच का रोमांचक प्रदर्शन और परिणाम

  • टॉस जीतकर पुलिस एकादश ने पहले बल्लेबाजी की और निर्धारित 15 ओवरों में 151 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया।
  • उप-निरीक्षक दिलबर सिंह भंडारी ने 80 रनों की तूफानी पारी खेली, जबकि पत्रकार एकादश के गेंदबाजों ने अपनी पूरी कोशिश की।
  • जवाब में पत्रकार एकादश संघर्ष करते हुए 14 ओवरों में 95 रन पर ऑल आउट हो गई।
  • पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने भी 4 रन बनाते हुए 2 महत्वपूर्ण विकेट लिए।
  • पत्रकार एकादश की ओर से राहुल मेहर ने सर्वाधिक रन बनाए और 2 विकेट झटके।

नशे से बचाव का संदेश और प्रेरणादायक अपील

मैच के दौरान स्थानीय कवि प्रकाश चंद्र जोशी “शूल” ने अपनी कविताओं से नशे के खिलाफ संदेश दिया। वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चंद्र पांडे और चंद्रशेखर जोशी ने भी युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहकर खेलों को अपनाएं।

सम्मान और पुरस्कार

  • शानदार प्रदर्शन के लिए उप-निरीक्षक दिलबर सिंह भंडारी को “मैन ऑफ द मैच” से नवाजा गया।
  • पत्रकार एकादश के कप्तान गिरीश सिंह बिष्ट को ट्रॉफी दी गई, जबकि विजेता पुलिस टीम को सम्मानित किया गया।
  • पुलिस अधीक्षक ने युवाओं को खेलों को अपनाने और नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया।

खेलों से जागरूकता: क्या यह नशे के खिलाफ सही हथियार बन सकता है?

यह सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं था, बल्कि एक सामाजिक संदेश था कि खेलों को अपनाकर युवा नशे की दलदल से बच सकते हैं। पुलिस और प्रशासन इस तरह के आयोजनों को लगातार बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं ताकि समाज में नशे के खिलाफ मजबूती से लड़ा जा सके।

➡ क्या इस तरह के आयोजनों से युवाओं को नशे से दूर किया जा सकता है? आपकी राय क्या है?

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