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क्या मिलेगा विस्थापितों को उनका हक? प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान को लेकर जिलाधिकारी का बड़ा फैसला
उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के चलते सैकड़ों परिवार विस्थापन और जमीन अधिग्रहण जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। टिहरी जिले में सौंग बांध पेयजल परियोजना से प्रभावित गांवों के लोग भी लंबे समय से उचित पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने पुश्तैनी घरों और जमीन से बेदखल हो रहे हैं, लेकिन उनके लिए उचित पुनर्वास की नीति स्पष्ट नहीं है।

जिलाधिकारी ने सुनीं प्रभावित परिवारों की समस्याएं
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को टिहरी जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने राजकीय इंटर कॉलेज रगड़गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक की और सौंग बांध से प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। इस दौरान रगड़गांव, घुड़सालगांव, खाली डांडा लग्गा सौदण के लोगों ने अपनी समस्याओं को रखा। जिलाधिकारी ने सभी प्रभावितों को आश्वासन दिया कि उनके भवनों के पुश्ते नापकर उचित मूल्यांकन किया जाएगा और आंशिक रूप से प्रभावित परिवारों के लिए सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

प्रभावित परिवारों की मुख्य मांगें और प्रशासन की प्रतिक्रिया
- भूमि अधिग्रहण का पुनर्मूल्यांकन
- ग्राम ग्वाली डांडा चक सौंदणा के गजेन्द्र सिंह ने पीएमजीएसवाई द्वारा अधिग्रहित भूमि को आंशिक से पूर्ण प्रभावित श्रेणी में रखने की मांग की, जिसे जिलाधिकारी ने स्वीकार कर लिया।
- कानूनी दस्तावेज और दाखिल-खारिज की समस्या
- ग्राम सौंदणा के बचन सिंह पंवार ने अपने स्वर्गीय पिता की जमीन को अपनी माता और भाइयों के नाम दर्ज कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने तहसीलदार को इस मामले की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
- छूटे हुए परिवारों का पुन: सर्वेक्षण
- प्रभावित परिवारों में से जिनके नाम सरकारी दस्तावेजों में छूट गए हैं, उन्हें उचित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
- कट-ऑफ डेट बढ़ाने की सहमति
- जिलाधिकारी ने विस्थापन की कट-ऑफ डेट बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे कई और प्रभावित परिवार लाभान्वित हो सकें।
- स्थानीय लोगों को रोजगार का आश्वासन
- बांध निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार देने की बात भी कही गई।
- सड़क निर्माण को लेकर भी मिले आश्वासन
- दुबड़ा से रगड़गांव, कुण्ड से सत्यों रोड और रिंग रोड को आपस में जोड़ने की योजना पर विचार किया गया।
- घुड़सालगांव के लिए 1.5 किमी लंबी सड़क बनाने को लेकर भी प्रशासन ने सहमति जताई।
प्रभावित परिवारों को समान भूमि देने की मांग अस्वीकार
बैठक में ग्रामीणों ने मांग की थी कि जितनी भूमि अधिग्रहित की जा रही है, उतनी ही भूमि उन्हें विस्थापित क्षेत्र में दी जाए। हालांकि, इस मांग को जिलाधिकारी ने अस्वीकार कर दिया।
आगे की प्रक्रिया
प्रशासन द्वारा आंशिक प्रभावित परिवारों की पुन: गणना कराई जाएगी और प्रभावित भवनों का फिर से सर्वे किया जाएगा।
इस मौके पर मौजूद अधिकारी
बैठक में एडीएम ए.के. पांडेय, परियोजना प्रबंधक विनोद रावत, सहायक प्रबंधक धीरेन्द्र, तहसीलदार राजेन्द्र सिंह समेत अन्य अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
सौंग बांध परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों को पुनर्वास और मुआवजे को लेकर कई सवालों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने उनकी मांगों को सुना जरूर है, लेकिन कई प्रमुख मांगों को ठुकरा भी दिया गया। अब देखना होगा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन आगे चलकर इन मुद्दों का समाधान कैसे करता है।



