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देहरादून के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार की नई पहल, शिक्षकों की चौपाल से उम्मीदें बढ़ीं
सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार क्यों जरूरी?
भारत में सरकारी स्कूलों को लेकर आम धारणा यह है कि यहां पढ़ाई का स्तर प्राइवेट स्कूलों की तुलना में कम है। कई माता-पिता बेहतर शिक्षा की तलाश में अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में भेजना पसंद करते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक और संसाधन उपलब्ध होते हैं। हालांकि, समय-समय पर इन स्कूलों में शिक्षकों के प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता महसूस की जाती है। इसी दिशा में एक नई पहल के तहत देहरादून के सहजपुर ब्लॉक में “शिक्षक चौपाल” का आयोजन किया गया, जहां सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने अपनी शिक्षण तकनीकों को साझा किया और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों पर चर्चा की।
शिक्षक चौपाल: सरकारी स्कूलों में शिक्षा को नई दिशा देने की कोशिश
रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून के बल्लूपुर चौक स्थित एक सरकारी स्कूल *भवानी बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षक चौपाल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सहजपुर ब्लॉक के 92 से अधिक सरकारी स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए, जिनमें से 25 शिक्षकों ने अपनी उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों को प्रस्तुत किया।
इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य “निपुण भारत मिशन” के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना था, जिसके तहत 2026 तक कक्षा 1 और 2 के सभी बच्चों को बुनियादी भाषा और गणित ज्ञान में दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के महत्वपूर्ण मानकों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे आगे की पढ़ाई में मजबूत आधार बना सकें।
शिक्षकों ने साझा किए बेहतरीन शिक्षण तरीके
इस चौपाल में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न शिक्षण सामग्रियों (Teaching Learning Materials – TLM) के उपयोग पर चर्चा की, जिससे बच्चों को भाषा और गणित की अवधारणाएँ समझने में आसानी हो। इस कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की टीम भी मौजूद रही, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए अपने प्रयासों को प्रस्तुत किया।
फाउंडेशन के अनुसार, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए शिक्षकों को उचित मंच देने की जरूरत है, जहां वे अपनी सफल शिक्षण तकनीकों को साझा कर सकें। इस चौपाल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि शिक्षकों के बेहतरीन अनुभवों से अन्य स्कूलों के शिक्षक भी प्रेरणा लें और अपने स्कूलों में लागू करें।
सरकारी स्कूल बनाम निजी स्कूल: शिक्षा की सच्चाई
कार्यक्रम के दौरान यह भी चर्चा हुई कि आम जनता में सरकारी स्कूलों को लेकर बनी नकारात्मक धारणा को बदलने की जरूरत है। कई लोग मानते हैं कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में कमी है, लेकिन चौपाल में शामिल शिक्षकों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में भी प्रशिक्षित और योग्य शिक्षक मौजूद हैं, जो संसाधनों की सीमाओं के बावजूद बेहतरीन शिक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकारी व्यवस्थाओं और संसाधनों को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। इस पहल के तहत शिक्षक चौपाल जैसे कार्यक्रम शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की योजना और शिक्षा सुधार के प्रयास
इस शिक्षक चौपाल के सफल आयोजन के बाद, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और स्थानीय शिक्षा विभाग ने ऐसे कार्यक्रमों को अन्य सरकारी स्कूलों में भी लागू करने की योजना बनाई है। आने वाले महीनों में देहरादून के अन्य ब्लॉकों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि शिक्षक अपने अनुभव साझा कर सकें और सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाया जा सके।
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन, शिक्षकों और समाज को एकजुट होकर काम करना होगा। शिक्षक चौपाल जैसे कार्यक्रम शिक्षा सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकते हैं।




