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साइबर अपराध का नया तरीका, मॉर्फ़ की गई तस्वीरों से ब्लैकमेलिंग का पर्दाफाश
डिजिटल युग में साइबर अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी निजी तस्वीरों और वीडियो को मॉर्फ़ कर ब्लैकमेलिंग का नया तरीका सामने आया है। यह गिरोह पीड़ितों को मानसिक तनाव में डालकर आर्थिक शोषण कर रहा था। ऐसे ही एक मामले में देहरादून पुलिस ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो महिलाओं की अश्लील मॉर्फ़ की गई तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर वसूली कर रहे थे।
संगठित साइबर अपराध का पर्दाफाश
दिल्ली-गुड़गांव से संचालित एक साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दून पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लोन रिकवरी एजेंट बनकर लोगों के डेटा चुराए और फिर खासतौर पर महिलाओं को निशाना बनाया। इन अपराधियों ने महिलाओं की तस्वीरों को मॉर्फ़ कर उन्हें ब्लैकमेल किया और धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए तो उनकी अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया और रिश्तेदारों को भेज दी जाएंगी।
कैसे करते थे अपराध?
पुलिस जांच में पता चला कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पहले कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। वहां से उन्होंने लोन लेने वाले ग्राहकों और उनके रिश्तेदारों के नंबर जुटाए। इसके बाद यह गिरोह वर्चुअल नंबरों से कॉल कर लोगों को धमकाता था और उनका व्यक्तिगत डेटा प्राप्त करता था।
आरोपी विशेष रूप से महिलाओं के नंबर टारगेट कर उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से तस्वीरें डाउनलोड करते और फिर उन्हें एडिट कर अश्लील मॉर्फ़ तस्वीरें तैयार करते। इसके बाद यह गिरोह उन तस्वीरों को इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग करता था। इसके लिए वे चोरी के मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करते थे।
पीड़िता की शिकायत से हुआ खुलासा
थाना नेहरू कॉलोनी में 31 जनवरी 2025 को एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात अपराधी अलग-अलग नंबरों से उसे और उसके परिजनों को धमका रहे हैं। आरोपियों ने महिला की मॉर्फ़ की गई तस्वीरें व्हाट्सएप पर भेजकर उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल जांच के आदेश दिए। सर्विलांस टीम ने तकनीकी जांच शुरू की और संदिग्ध नंबरों को ट्रैक किया।
दिल्ली-गुड़गांव से तीन आरोपी गिरफ्तार
जांच के बाद पुलिस टीम ने 08 फरवरी 2025 को दिल्ली-गुड़गांव में छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे पहले कॉल सेंटर में काम करते थे और वहीं से उन्होंने लोगों के मोबाइल नंबर और निजी डेटा इकट्ठा किया था।
गिरफ्तार अपराधियों की पहचान:
- सचिन कुमार (22 वर्ष) – मूल निवासी छपरा, बिहार, वर्तमान में द्वारका, नई दिल्ली में रह रहा था।
- विशाल तिवारी (24 वर्ष) – मूल निवासी छपरा, बिहार, वर्तमान में गुड़गांव में रह रहा था।
- पवन कुमार (24 वर्ष) – मूल निवासी मोतीहारी, बिहार, वर्तमान में गुड़गांव में रह रहा था।
बरामद सामग्री:
- घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल फोन (Apple कंपनी) बरामद।
- विभिन्न वर्चुअल नंबरों के रिकॉर्ड।
- चोरी के लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस।
आरोपियों को भेजा गया जेल
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के खिलाफ धारा 308(3), 351(2), 352 BNS और 67(डी) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। 09 फरवरी 2025 को तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की भी जांच कर रही है।
पुलिस टीम की भूमिका
- नि. मनोज कुमार मैनवाल – प्रभारी कोतवाली डालनवाला
- उ.नि. मोहन सिंह – थानाध्यक्ष नेहरू कॉलोनी
- नि. शंकर सिंह बिष्ट – प्रभारी एसओजी, देहरादून
- तकनीकी टीम – पुलिस सर्विलांस टीम
साइबर अपराध से बचाव के उपाय:
- अनजान नंबरों से आए कॉल या मैसेज में किसी भी तरह की निजी जानकारी साझा न करें।
- अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट रखें और अनजान लोगों को तस्वीरें भेजने से बचें।
- अगर कोई ब्लैकमेलिंग की कोशिश करे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
- डिजिटल सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहें।



