Monday, February 16, 2026
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भिक्षावृत्ति छोड़ शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: डीएम के फैसले से बदली बच्चों की तकदीर

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देहरादून में आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर बना शिक्षा का नया केंद्र

देहरादून में सड़क पर भीख मांगने और जीवन यापन के लिए संघर्ष करने वाले बच्चों के लिए एक नई आशा जगी है। भीख मांगने की मजबूरी में फंसे ये बच्चे अब कलम पकड़कर अपने भविष्य को संवारने के लिए तैयार हैं। शिक्षा से कटे इन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ज़िला प्रशासन की एक अनूठी पहल सामने आई है, जिससे शहर के घुमंतू और असहाय बच्चे अब स्कूल जाने वाले सामान्य बच्चों की तरह पढ़ाई कर रहे हैं।

डीएम देहरादून का ऐतिहासिक निर्णय

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज़िलाधिकारी (डीएम) देहरादून सविन बंसल द्वारा सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक विशेष ‘आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर’ की स्थापना का निर्णय लिया गया। इस केंद्र का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। प्रशासन की इस पहल का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है, क्योंकि अब ये बच्चे खुद आगे आकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए तैयार हो रहे हैं।

26 बच्चों ने लिया शिक्षा का संकल्प

शहर के विभिन्न हिस्सों से 26 बच्चे आज आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर पहुंचे, जिनमें 20 बालक और 6 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें से 15 बच्चों को रेस्क्यू कर इस पहल के तहत शिक्षा से जोड़ा गया, जबकि 11 बच्चे शिशु निकेतन से इस केंद्र में पहुंचे। इस पहल के तहत बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई कराई जा रही है ताकि वे सहज तरीके से शिक्षा की ओर आकर्षित हों।

सड़क से स्कूल तक का सफर

शहर की सड़कों पर भीख मांगने वाले इन बच्चों के लिए यह बदलाव किसी सपने से कम नहीं है। प्रशासन के प्रयासों से उन्हें न सिर्फ शिक्षा मिल रही है, बल्कि सुरक्षित वातावरण में रहने, भोजन, और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी दी जा रही हैं। अब ये बच्चे अपने जीवन को एक नई दिशा देने के लिए तैयार हैं और समाज के अन्य बच्चों की तरह अपने भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं।

समाज और प्रशासन से अपील

इस पहल की सफलता के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा। आम नागरिकों से अपील की जाती है कि वे सड़कों पर बच्चों को भीख देने के बजाय उन्हें शिक्षा की ओर प्रेरित करें। प्रशासन भी इस मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह समय है जब समाज मिलकर इन बच्चों का भविष्य संवारने में योगदान दे।

 

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