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धर्म, जाति और लिंग भेदभाव से परे समान नागरिक संहिता: ग्राफिक एरा में हुई कार्यशाला में एसएसपी दून ने किया प्रतिभाग
देहरादून | 03 फरवरी 2025
भारत में कानून व्यवस्था को अधिक समावेशी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया। इस कानून के तहत नागरिकों को बिना किसी धार्मिक, जातीय या लैंगिक भेदभाव के समान कानूनी अधिकार दिए जाते हैं। इसे लेकर लोगों में कई सवाल और जिज्ञासाएं बनी हुई हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में ग्राफिक एरा में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून ने भाग लिया और उपस्थित छात्र-छात्राओं को यूसीसी के महत्व और प्रभाव के बारे में जानकारी दी।

यूसीसी से नागरिकों को क्या लाभ?
कार्यशाला में एसएसपी ने बताया कि यूसीसी शादी, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति विवादों से जुड़े कानूनी पहलुओं को समान रूप से लागू करता है। यह कानून किसी भी समुदाय विशेष को लक्षित नहीं करता, बल्कि समाज में एकरूपता और समानता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि इस संहिता के लागू होने से महिलाओं को विशेष रूप से लाभ मिलेगा, क्योंकि विवाह और संपत्ति अधिकारों से जुड़े विवादों में अब भेदभाव की संभावना समाप्त हो जाएगी।

छात्र-छात्राओं के सवालों के जवाब
कार्यशाला में छात्रों ने यूसीसी से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका एसएसपी ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि यह संहिता न केवल महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को बल देती है, बल्कि यह कानूनी विवादों को तेजी से सुलझाने में भी मददगार होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि व्यक्तिगत अधिकारों को सुनिश्चित करता है।

युवाओं को जागरूक करने का आह्वान
एसएसपी ने कार्यशाला में उपस्थित छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे इस विषय में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाएं और समाज को सही जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कई बार गलतफहमियों के कारण समाज में भ्रम की स्थिति बन जाती है, इसलिए आवश्यक है कि लोग प्रमाणिक जानकारी प्राप्त करें और दूसरों तक पहुंचाएं।

कार्यशाला में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला, संयुक्त निदेशक विधि जी.सी. पंचोली, विशेष लोक अभियोजक पंकज राज और ममता मानादूली, ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह, सहायक अभियोजन अधिकारी भानु प्रताप बिष्ट सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
यूसीसी भारत में एक संवेदनशील विषय रहा है, लेकिन इसके लागू होने से समाज में समानता और पारदर्शिता आएगी। देहरादून में आयोजित इस कार्यशाला ने छात्रों को इस विषय में जागरूक किया और उनकी शंकाओं का समाधान किया। ऐसी कार्यशालाओं से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।




