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भिक्षावृत्ति: समाज के भविष्य पर गहरा खतरा
भिक्षावृत्ति, विशेष रूप से बच्चों के बीच, समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। यह न केवल उनके बचपन को प्रभावित करता है बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य से भी वंचित कर देता है। भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चे अक्सर शोषण और अपराध का शिकार बनते हैं। इससे न केवल उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है बल्कि समाज के समग्र विकास में भी बाधा आती है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए देहरादून में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई: 93 बच्चे रेस्क्यू
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में देहरादून में भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत, 13 दिसंबर 2024 को रेस्क्यू टीम ने काली मंदिर बिहारी बस्ती से भिक्षावृत्ति में लिप्त चार बच्चों को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू किए गए बच्चों का जीडी और मेडिकल परीक्षण कर उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
बच्चों की सुरक्षा का इंतजाम
रेस्क्यू के बाद दो बच्चों को राजकीय शिशु सदन और दो बच्चों को समर्पण (खुला आश्रय) में रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2024 से अब तक 93 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें 52 बालक और 41 बालिकाएं शामिल हैं।
जिलाधिकारी का बयान
जिलाधिकारी सविन बंसल ने भिक्षावृत्ति के विरुद्ध अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। इस अभियान की मॉनिटरिंग स्वयं जिलाधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को भिक्षावृत्ति से बचाना प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्रवाई की जाएगी।
अभियान की जानकारी
रेस्क्यू अभियान के दौरान न केवल बच्चों को बचाने पर ध्यान दिया गया, बल्कि उनके पुनर्वास और शिक्षा के प्रबंध भी किए जा रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य भिक्षावृत्ति की जड़ पर प्रहार कर इसे पूरी तरह समाप्त करना है।



