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सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं: देहरादून में प्रोजेक्ट उत्कर्ष के तहत बड़ा कदम
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास को बाधित करती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि बच्चों को खेल, तकनीकी और आधारभूत सुविधाओं तक समान पहुंच मिले। इसी उद्देश्य से देहरादून जिला प्रशासन ने “प्रोजेक्ट उत्कर्ष” के तहत एक व्यापक योजना बनाई है, जिसमें स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
94 लाख की धनराशि आवंटित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट उत्कर्ष के तहत राजकीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति के लिए 94 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस परियोजना के तहत 1 करोड़ रुपये की धनराशि मुख्य शिक्षा अधिकारी के नियंत्रण में रखी है, ताकि आवश्यकतानुसार इसे विभिन्न विकासखंडों में वितरित किया जा सके।
पहले चरण की प्रगति
पहले चरण में सभी राजकीय माध्यमिक और जूनियर विद्यालयों में कक्षाओं में व्हाइट बोर्ड और एलईडी बल्ब की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है। खंड शिक्षा अधिकारियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर राशि आवंटित कर विद्यालयों में अन्य आवश्यक संसाधन स्थापित किए जा रहे हैं। चकराता, कालसी, विकासनगर, सहसपुर, रायपुर और डोईवाला विकासखंडों को इस योजना के तहत धनराशि आवंटित की गई है।
खेल और मनोरंजन सुविधाओं पर जोर
जिला प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्राथमिक विद्यालयों में झूले, बेबी स्लाइड जैसे खेल उपकरण लगाए जाएं। इसके अलावा, राजकीय जूनियर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के विद्यालयों में आउटडोर खेल गतिविधियों जैसे वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण किया जाएगा। 35 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था
खास तौर पर चकराता और कालसी जैसे क्षेत्रों के विद्युत विहीन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी विद्यालय बिजली, फर्नीचर या अन्य आवश्यक संसाधनों से वंचित न रहे।
सख्त निगरानी और मॉनिटरिंग
सीडीओ के समग्र समन्वय में इस योजना की गहन मॉनिटरिंग की जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना से संबंधित रिपोर्ट फोटोग्राफ के साथ प्रस्तुत करें।
जिला प्रशासन के अनुसार, यह अभियान बच्चों के समग्र विकास और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम है।



