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राष्ट्रीय शिक्षा नीति: देहरादून में डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, राष्ट्रीय कार्यशाला की तैयारी”

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उच्च शिक्षा के लिए स्वायत्तता और गुणवत्ता पर फोकस

ड्रग्स, अवैध खनन, या अन्य सामाजिक मुद्दों की तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है। शिक्षा न केवल एक राष्ट्र की नींव को मजबूत करती है, बल्कि सामाजिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती है। इस दिशा में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उत्तराखंड सरकार ने ठोस कदम उठाने की तैयारी की है।

देहरादून, 26 नवंबर 2024
राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता प्रदान करने और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। दून विश्वविद्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने की।

बैठक में लिए गए अहम निर्णय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, और विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार:

  • उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं के लिए आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी बनाने का लक्ष्य तय किया गया।
  • शिक्षकों और संसाधनों का परस्पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाएगा।
  • हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा देते हुए 40% पाठ्यक्रम को ऑनलाइन अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया गया।
  • नैक प्रत्यायन को प्रोत्साहन देकर अधिक से अधिक संस्थानों को स्वायत्त बनाया जाएगा।

डॉ. रावत ने बताया कि राज्य सरकार का प्रयास है कि शिक्षा संस्थानों का विकास ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर आधारित हो, जिससे सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। इसके अलावा, शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्ष 2025 में ‘नेशनल समिट फॉर इंस्टीट्यूशनल लीडर्स (NSIL)’ का आयोजन उत्तराखंड में किया जाएगा, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति हिस्सा लेंगे। यह आयोजन NEP-2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने और नेतृत्व क्षमता को सशक्त बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

उपस्थित अधिकारी और प्रतिभागी
बैठक में विद्या भारती के पदाधिकारी रघुनंदन, प्रो. सुरेखा डंगवाल (कुलपति, दून विश्वविद्यालय), प्रो. एन. के. जोशी (कुलपति, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय), प्रो. दिनेश शास्त्री (कुलपति, संस्कृत विश्वविद्यालय), और अन्य प्रमुख शिक्षाविदों ने भाग लिया।

डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के विकास के लिए सतत प्रयास कर रही है। बैठक में लिए गए निर्णय न केवल राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देंगे, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेंगे।

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