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देहरादून। कूड़ा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था किसी भी शहर की बुनियादी जरूरतों में से एक है। साफ-सफाई में लापरवाही न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरे में डालती है, बल्कि शहर की छवि पर भी बुरा असर डालती है। सफाई कार्य में लापरवाही और संसाधनों की कमी से देहरादून के कई वार्डों में कचरा उठाने की समस्या गंभीर होती जा रही है। इस संदर्भ में जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी सविन बंसल ने नगर निगम कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में साफ तौर पर कहा कि कूड़ा प्रबंधन केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से सीधा जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने सफाई कार्य में लगे निजी कंपनियों को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित शर्तों के अनुसार कार्य करें, अन्यथा नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कूड़ा उठाने वाली कंपनियों इकोन वेस्ट मैनेजमेंट और सनलाइट को निर्देश दिए कि अपने संसाधनों में वृद्धि करें या अपने मौजूदा संसाधनों से दोहरी ड्यूटी करें। वहीं, शीशमबाड़ा प्लांट में कचरे के निस्तारण में हो रही लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए संबंधित कंपनियों के उच्च अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुपस्थित रहने पर कंपनियों के अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, नगर निगम ने सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ शहर की प्रकाश व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित किया। अधिकारियों ने बताया कि 1 अक्टूबर से अब तक 26,852 स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत की गई है, जिनमें 4,072 लाइटें सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर ठीक की गई हैं।
बैठक में मुख्य नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त बीर सिंह बुदियाल, उप नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और जरूरत पड़ने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।



