Thursday, June 18, 2026
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​क्या राजीव नयन नौटियाल को मिलेगा इंसाफ? वन मुखिया (HoFF) आर.के. मिश्रा के रिटायरमेंट से पहले SDO ने उच्च अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग!

पहाड़ की दहाड़ न्यूज़

​दिनांक: 18 जून 2026

​देहरादून उत्तराखंड वन विभाग के वर्तमान वन मुखिया (HoFF) आर.के. मिश्रा का कार्यकाल इन दिनों भारी विवादों के घेरे में है।

विभागीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि आर.के. मिश्रा इसी महीने यानी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

 

ऐसे में चकराता वन प्रभाग के SDO राजीव नयन नौटियाल ने 16 जून 2026 को पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ को दिए अपने ऑन-कैमरा विशेष साक्षात्कार में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

​350 से 400 करोड़ की सालाना राजस्व चोरी का काला सच

​SDO राजीव नयन नौटियाल ने साक्षात्कार में एक सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट के माध्यम से किए गए अपने गहन विश्लेषण में उन्होंने पाया है कि आसन नदी के तटों पर चल रहे अवैध खनन के कारण

प्रदेश सरकार को हर साल लगभग 350 से 400 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।

नौटियाल का कहना है मुझे किसी राष्ट्रपति या राज्यपाल सम्मान की लालसा नहीं है। मेरा एकमात्र उद्देश्य अपने जंगलों और प्रकृति को बचाना है। यदि इस अवैध कमाई और चोरी को रोक दिया जाए तो इस राशि से प्रदेश के जर्जर स्कूलों को आधुनिक बनाया जा सकता है और सरकारी अस्पतालों में विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जा सकती हैं। यह पैसा जनता का है जिसे माफिया लूट रहे हैं।

​वन विभाग मुखिया आर.के. मिश्रा के कार्यकाल में

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं

​नौटियाल ने बताया कि फरवरी 2024 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे। पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ के पास मौजूद दस्तावेजों (पत्र संख्या 3356 / 29-1 दिनांक 22 जून 2024) के अनुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 14 फरवरी 2024 को अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिज़र्व के 10 किलोमीटर के दायरे में कोई भी खनन गतिविधि नहीं की जाएगी जब तक कि परियोजना प्रस्तावक नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की स्थायी समिति या पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति प्राप्त न कर ले।

इस आदेश के अनुपालन में अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पाण्डेय ने चकराता वन प्रभाग को कड़े निर्देश भेजे थे

 

 

 

लेकिन इन आदेशों के बावजूद वन विभाग मुखिया आर.के. मिश्रा के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

यह न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है बल्कि सीधे तौर पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना (Contempt of Court) का गंभीर मामला है।

 

​आर.के. मिश्रा की चुप्पी और प्रशासनिक विफलता

​हैरानी की बात यह है कि जब यह मामला इतना गंभीर है और इसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन हो रहा है, तो वन विभाग मुखिया (HoFF) आर.के. मिश्रा की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। एक HoFF के रूप में आर.के. मिश्रा का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व था कि वे स्वयं इस मामले का संज्ञान लेते और चकराता DFO को सीधे जवाबदेह बनाते। जब स्थानीय स्तर पर SDO द्वारा बार-बार रिपोर्ट भेजी गई और अवैध खनन का खुलासा हुआ तब भी विभाग के मुखिया द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना और अपने DFO को मूकदर्शक बने रहने देना यह सिद्ध करता है कि वन विभाग में सब कुछ ऊपर से सेट है।

क्या विभाग के मुखिया अपनी रिटायरमेंट से पहले इन माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं? यह चुप्पी विभाग के मुखिया की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा कलंक है।

 

​प्रशासनिक प्रताड़ना और सिस्टम की बाधाएं

 

 

​SDO राजीव नयन नौटियाल ने आरोप लगाया कि अवैध खनन के खिलाफ उनकी सक्रियता से बौखलाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है

1 ​संसाधनों पर रोक उन्हें गश्त (पेट्रोलिंग) करने के लिए वाहन और तेल का खर्च तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी ढंग से निगरानी नहीं कर पा रहे हैं।

2 ​वॉच टावर की अनदेखी उन्होंने अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक उच्च तकनीक वाला कैमरा वॉच टावर लगाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन DFO वैभव सिंह ने इस पर चुप्पी साध ली।

3 ​उच्च अधिकारियों का असहयोग दस्तावेजों के अनुसार SDO ने अपने DFO को कई पत्र लिखे और स्थल निरीक्षण के लिए बुलाया लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने न तो निरीक्षण किया और न ही कोई सहयोग दिया जो कर्तव्यों के प्रति उदासीनता की ओर इशारा करता है।

उत्तराखंड के DGP पुलिस से सुरक्षा की पुरजोर मांग 

​ट्रांसफर का भय और सुरक्षा की गुहार

​साक्षात्कार के दौरान SDO राजीव नयन नौटियाल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अवैध खनन के खिलाफ उनकी मुखरता के कारण उन्हें आशंका है कि उनका स्थानांतरण किया जा सकता है। माफियाओं से अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए नौटियाल ने उत्तराखंड के DGP पुलिस से सुरक्षा की पुरजोर मांग की है।

उन्होंने कहा मैं अपनी जान की परवाह किए बिना काम कर रहा हूँ लेकिन विभाग का फर्ज है कि वह अपने ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान करे।

​आर.के. मिश्रा के कार्यकाल में बढ़ी अराजकता

​प्राप्त दस्तावेजों साक्ष्यों और वर्तमान में चल रही गतिविधियों के आधार पर पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ का यह निष्कर्ष है कि आर.के. मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग लगातार अपनी विश्वसनीयता खो रहा है

1 ​कर्मचारियों और अधिकारियों पर जानलेवा हमले आशा रोड़ी रेंज और विकासनगर में वन कर्मियों पर हुए जानलेवा हमले तथा SDO राजीव नयन नौटियाल पर हुआ हमला विभाग की कमजोर सुरक्षा का प्रमाण हैं।

2 ​गुलदार का आतंक पौड़ी जनपद सहित प्रदेश भर में गुलदार के हमलों से आम नागरिकों की लगातार हो रही मौतें और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती हैं। यह अराजकता लंबे समय से विभाग के मुखिया के कार्यकाल में निरंतर बढ़ती रही है।

3 ​अधिकारियों के प्रति उदासीनता: ईमानदार SDO द्वारा बार-बार पत्र लिखने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण न करना विभाग में फैले भ्रष्टाचार की जड़ को दर्शाता है।

 

​सत्य की राह पर अडिग मैं किसी से डरने वाला नहीं

​साक्षात्कार में नौटियाल का हौसला बुलंद था। उन्होंने स्पष्ट कहा मुझे किसी भी चीज का डर नहीं है। इस देश में न्यायपालिका है और मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा है। जब तक मुझे इंसाफ नहीं मिल जाता मैं इसी तरह गलत कार्यों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखूंगा।

 

​पत्रकार की कलम से एक निष्पक्ष रिपोर्ट

पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ के संपादक क्रांतिकारी सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा अपने लंबे पत्रकारिता करियर के दौरान मैंने आज तक वन विभाग ही नहीं बल्कि किसी भी अन्य सरकारी विभाग में ऐसा कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं देखा जो व्यवस्था की खामियों और माफिया गठजोड़ के खिलाफ इतनी प्रमुखता मुखरता और निडरता के साथ मीडिया के समक्ष अपनी बात रख सके।

SDO राजीव नयन नौटियाल का यह साहस ऐतिहासिक है।

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह रिपोर्ट किसी व्यक्तिगत आरोप पर आधारित नहीं है बल्कि यह उन सरकारी दस्तावेजों और साक्ष्यों पर आधारित है जो उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को प्रेषित किए थे। हम इस मामले में विभागीय मुखिया आर.के. मिश्रा या प्रभागीय वन अधिकारी वैभव सिंह का पक्ष सुनने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। यदि वे हमें समय देते हैं या अपना पक्ष रखने का मौका देते हैं तो हम उनकी बात को भी पूरी निष्पक्षता और प्रमुखता के साथ जनता के सामने रखेंगे।

 

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वन मुखिया आर.के. मिश्रा अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में इस गंभीर मामले पर कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर यह घोटाला फाइलों के बोझ तले दब जाएगा?

​पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ डिजिटल एंड पोर्टल चैनल इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

 

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