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गर्मी के मौसम की दस्तक के साथ ही जलजनित बीमारियों, विशेषकर डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है। देहरादून, जो कि एक घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है, इस खतरे के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। ऐसे में, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय रहते प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में, देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने डेंगू की रोकथाम के लिए सक्रियता दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और आशा कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज ऋषिपर्णा सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और आशा फेसिलेटर के साथ डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर एक विस्तृत बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पूरी सक्रियता के साथ काम करते हुए डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी बंसल ने डेंगू की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को 1500 रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अच्छा कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और आशा फेसिलेटर को 1555 रुपये का पुरस्कार भी अलग से दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि कोई आशा कार्यकर्ता डेंगू से संक्रमित होती है, तो उसके प्राथमिकता से उपचार की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी।
जिलाधिकारी ने दून चिकित्सालय में ब्लड सेपरेटर मशीन की आवश्यकता को देखते हुए इसके लिए 1 करोड़ रुपये की धनराशि तत्काल जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने डोनर रजिस्ट्री को भी यथासंभव बढ़ाने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि एक प्रशासनिक समिति निजी चिकित्सालयों में डेंगू टेस्ट की दरों और सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुपालन की जांच करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी निजी चिकित्सालय या लैब द्वारा निर्धारित दरों से अधिक वसूली की जाती है या गाइडलाइन का उल्लंघन किया जाता है, तो उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा और क्लीनिक को सील कर दिया जाएगा। सभी लैब्स को निर्धारित दरों की सूची स्पष्ट रूप से चस्पा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी बंसल ने कहा कि समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर करता है, इसलिए जन अस्पतालों को पूरी तरह से सक्षम बनाना होगा ताकि वंचित और निर्बल वर्ग को महंगी निजी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि मैनपावर, आवश्यक सामग्री और मशीनरी की कोई कमी न हो, जिससे किसी भी व्यक्ति को रोग से ग्रसित न होना पड़े। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को हॉस्पिटल सर्ज प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए, ताकि संक्रमण बढ़ने की स्थिति में दूर-दराज के पीएचसी और सीएचसी की चिकित्सकीय टीमों को भी तत्काल बुलाया जा सके।
जिलाधिकारी ने डेंगू नियंत्रण गतिविधियों की प्रभावी निगरानी के लिए आशा कार्यकर्ताओं का वार्डवार प्लान, विभिन्न विभागों की गतिविधियों और नालों की सफाई की प्रगति को गूगल स्प्रेडशीट के माध्यम से सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में जागरूकता गोष्ठी आयोजित करने और टीमों को घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करने के लिए भी कहा।
जिलाधिकारी ने नगर निगम को भी निर्देश दिए कि रिस्पना और बिंदाल नदी के तटों सहित शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई 15 मई तक हर हाल में पूरी की जाए और डेंगू के हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सभी क्षेत्रों में लार्विसाइडल टैंकरों से केमिकल का छिड़काव कर मच्छर के लार्वा को नष्ट करने और नियमित रूप से फॉगिंग करने के भी निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने नगर निगम को लार्विसाइड टैंकरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 20 करने के निर्देश दिए और कहा कि प्रत्येक 10 वार्ड के लिए एक समर्पित लार्विसाइड टैंकर तैनात रहेगा, जिसके लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार, एसडीएम हरिगिरि, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सीएस रावत, डॉ निधि सहित संबंधित अधिकारी और आशा फेसिलेटर उपस्थित थे।



