Thursday, February 12, 2026
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डोईवाला, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में 136 मदरसों पर कार्रवाई, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए वित्तीय जांच के आदेश

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उत्तराखंड में मदरसों पर सरकार की सख्ती, 136 अवैध संस्थान बंद, वित्तीय स्रोतों की जांच के आदेश

शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित मदरसों की व्यापक जांच शुरू की है। मदरसों की मान्यता और वित्तीय स्रोतों को लेकर सरकार पहले से ही सख्त रुख अपना रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में लगभग 450 मदरसे शिक्षा विभाग या मदरसा बोर्ड से पंजीकृत हैं, लेकिन 500 से अधिक बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। बिना अनुमति संचालित शिक्षण संस्थान न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी जन्म दे रहे हैं। इसी कड़ी में, सरकार ने 136 गैर-पंजीकृत मदरसों को बंद कर दिया है और इनके वित्तीय स्रोतों की जांच के आदेश दिए हैं।

मदरसों पर कार्रवाई और वित्तीय जांच के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में संचालित मदरसों के वित्तीय स्रोतों की गहन जांच करें। यह कदम तब उठाया गया जब यह पाया गया कि मार्च के बाद से राज्य में 136 मदरसों को पंजीकरण न होने के कारण बंद कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि अवैध रूप से संचालित शिक्षण संस्थानों की पहचान कर उन पर कार्रवाई जारी रहेगी।

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने जनवरी में एक सत्यापन अभियान शुरू किया था, जिसके तहत जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे राज्य के सभी मदरसों की जांच करें और उनकी वित्तीय स्थिति को समझें। इसके बाद, जिला प्रशासन ने विभिन्न जिलों में मदरसों का सर्वेक्षण किया और रिपोर्ट में कई अनियमितताएं उजागर हुईं। रिपोर्ट के आधार पर, 64 मदरसों को उधम सिंह नगर में, 44 को देहरादून में, 26 को हरिद्वार में और 2 को पौड़ी गढ़वाल में सील कर दिया गया।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चिंताओं का हवाला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार का मानना है कि खासतौर पर उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे कुछ इलाकों में बिना अनुमति संचालित मदरसे सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। सरकारी संचार के अनुसार, इन अवैध संस्थानों की निगरानी की जा रही है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

मदरसा बोर्ड और इस्लामिक संगठनों की प्रतिक्रिया

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमूम कासमी ने कहा कि जिन मदरसों को बंद किया गया है, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए ताकि छात्रों की शिक्षा बाधित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग उन पाठ्यक्रमों के समकक्षता के मुद्दे को हल करने पर काम कर रहा है, जिससे मदरसों में पढ़े छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में समायोजित किया जा सके।

वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राज्य सचिव खुर्शीद अहमद ने इस कार्रवाई को ‘अवैध’ बताया और आरोप लगाया कि मदरसों के प्रबंधकों को पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह की बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने के लिए एक आधिकारिक आदेश पारित करना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ है। उनका यह भी कहना था कि रमजान के दौरान जब अधिकांश बच्चे अपने घरों को लौट चुके होते हैं, तब इस तरह की कार्रवाई से उनकी शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

प्रदेशभर में जिला स्तरीय निरीक्षण जारी

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी 13 जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में निरीक्षण अभियान चलाया था। हालांकि, इस निरीक्षण की पूरी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मान्यता प्राप्त मदरसे राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के तहत कार्यरत होते हैं, जबकि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे प्रायः इस्लामिक सेमिनरी जैसे दारुल उलूम देवबंद और दारुल उलूम नदवतुल उलमा के निर्धारित पाठ्यक्रमों का पालन करते हैं।

सरकार के इस कदम से प्रदेश में शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में अहम प्रभाव पड़ने की संभावना है। वहीं, प्रभावित मदरसे और समुदाय सरकार के इस फैसले पर असहमति व्यक्त कर रहे हैं।


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