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देहरादून: 50 स्कूलों में डिजिटल लर्निंग, जिलाधिकारी ने 5 करोड़ किए जारी, IIT मद्रास के सहयोग से हाईटेक शिक्षा
देहरादून, 02 मार्च 2025: शिक्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए अब परंपरागत शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग किया जा रहा है। खासकर सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लर्निंग से न केवल छात्रों की समझ बेहतर होती है, बल्कि इससे शिक्षकों की कमी की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। इसी दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है।

प्रोजेक्ट उत्कर्ष के तहत 50 स्कूलों में हाईटेक शिक्षा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देहरादून जिला प्रशासन ने IIT मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के सहयोग से प्रोजेक्ट उत्कर्ष की शुरुआत की है। इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के 50 सरकारी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं, वर्चुअल रियलिटी (VR), LED टीवी, वाईफाई और अन्य डिजिटल संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है।
प्रोजेक्ट का उद्देश्य गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को अधिक प्रभावी और इंटरैक्टिव तरीके से पढ़ाना है। इसके लिए इंटरएक्टिव सिमुलेशन (वर्चुअल लैब) और गेमीफिकेशन (खेल-खेल में पढ़ाई) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने 5 करोड़ रुपये जारी किए
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिलाधिकारी सविन बंसल ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि विद्या शक्ति कार्यक्रम के तहत डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाए। जिलाधिकारी ने स्कूलों को हाइटेक बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
इसके साथ ही खंड शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को इस प्रोजेक्ट से जुड़ी ट्रेनिंग देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि ऑनलाइन शिक्षण प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाई जा सके।
स्थानीय भाषा में भी मिलेगा डिजिटल लर्निंग कंटेंट
IIT मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. एस सुब्रमण्यम ने बताया कि उत्तराखंड में तारा जोशी फाउंडेशन के सहयोग से डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। छात्रों को स्थानीय हिंदी भाषा में भी ऑनलाइन अध्ययन की सुविधा दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी आसानी से इस माध्यम को अपना सकें।
शिक्षकों की कमी होगी दूर, अधिक बच्चों को मिलेगा फायदा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और उन छात्रों को डिजिटल लर्निंग उपलब्ध कराना है, जो ट्यूशन जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकते।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य शिक्षा अधिकारी वीके ढौंडियाल, ओपन मेंटर से आए डॉ. एस सुब्रमण्यम और तारा जोशी फाउंडेशन की किरन जोशी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।



