Wednesday, February 11, 2026
Google search engine
Homeउत्तराखंडदेहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के प्रयासों से भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को...

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के प्रयासों से भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को मिल रही नई दिशा, आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर में सीख रहे कंप्यूटर और संगीत

आप को बता दे


बचपन का भविष्य सुधारने की पहल

भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का बचपन अंधकार में डूब जाता है, जहां शिक्षा, सम्मान और विकास की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं। ऐसे बच्चे अक्सर अपराध, शोषण और गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं, जिससे बाहर निकलना कठिन हो जाता है। इन्हें मुख्यधारा में लाने और भविष्य संवारने के लिए सरकार एवं प्रशासन द्वारा कई प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है, जहां बच्चों को केवल बचाया नहीं जा रहा, बल्कि उन्हें शिक्षा, तकनीकी और कला से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।


भिक्षावृत्ति से मुक्ति के बाद शिक्षा और कौशल विकास

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा से जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा राज्य का पहला आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर तैयार किया गया है। यह शेल्टर उन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है, जिन्हें भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया है।

देहरादून के साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित इस मॉडल इन्टेंसिव केयर शेल्टर को युद्धस्तर पर विकसित किया जा रहा है। यहां बच्चों को न केवल औपचारिक शिक्षा दी जा रही है, बल्कि तकनीकी ज्ञान, कंप्यूटर स्किल, संगीत, चित्रकला और खेल जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।


तकनीकी और संगीत शिक्षा से नया जीवन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर में अब कंप्यूटर उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं, जिससे बच्चे तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, संगीत कक्ष भी तैयार किया गया है, जहां बच्चों को संगीत शिक्षा दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि इन बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न की जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।

इस इन्टेंसिव केयर शेल्टर में प्रतिदिन 25-30 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं और अपने भविष्य को संवारने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इनमें रेस्क्यू किए गए बच्चों के अलावा अन्य संस्थानों और घरों से भी बच्चे आ रहे हैं।


मुख्यधारा से जुड़ने की नई राह

यह इन्टेंसिव केयर शेल्टर निजी स्कूलों की तरह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस पहल से बच्चों की रुचि शिक्षा में बढ़ रही है और वे कंप्यूटर ज्ञान, संगीत, चित्रकला, खेल आदि के माध्यम से अपने आत्मविश्वास को मजबूत कर रहे हैं।

इस प्रयास से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की संख्या में कमी आएगी और वे शिक्षा एवं कौशल विकास के माध्यम से समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकेंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments