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देहरादून: बालश्रम और भिक्षावृत्ति के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई, कई बच्चे रेस्क्यू
क्या बच्चों का बचपन यूं ही छिनता रहेगा?

सड़कों पर भीख मांगते और कूड़ा बीनते बच्चों को देखकर मन में सवाल उठता है—क्या इनका भविष्य अंधकारमय ही रहेगा? क्या इन मासूमों को पढ़ने-लिखने और अच्छा जीवन जीने का हक नहीं? उत्तराखंड सरकार ने राज्य को बालश्रम और भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने का संकल्प लिया है, जिससे ये बच्चे अपनी जिंदगी सुधार सकें। इसी दिशा में देहरादून जिला प्रशासन लगातार कदम उठा रहा है और रेस्क्यू अभियान के जरिए बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सेलाकुई और अन्य इलाकों से बच्चों को रेस्क्यू
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 22 फरवरी 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर भिक्षावृत्ति रेस्क्यू टीम देहरादून ने सेलाकुई से एक बालिका और चार बालकों को बालश्रम में लिप्त पाए जाने पर रेस्क्यू किया। इन बच्चों की प्राथमिक जांच और मेडिकल कराने के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके तहत एक बालिका को राजकीय बालिका निकेतन में और चार बालकों को समर्पण (खुला आश्रय) में भेजा गया।

भिक्षावृत्ति और बालश्रम में लिप्त अन्य बच्चों की भी बचाव कार्यवाही
इसी क्रम में, लालपुल क्षेत्र के माता वाला बाग से एक बालक और एक बालिका को भीख मांगते हुए और राजीव नगर डांडा, जैन प्लॉट से तीन बालकों को बालश्रम में लिप्त पाए जाने पर रेस्क्यू किया गया। इन बच्चों को भी मेडिकल जांच के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इनमें से एक बालक और एक बालिका को राजकीय शिशु सदन, जबकि तीन बालकों को समर्पण (खुला आश्रय) में रखा गया।

सितंबर 2024 से अब तक 181 बच्चों को रेस्क्यू किया गया
बालश्रम और भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान के तहत सितंबर 2024 से अब तक कुल 181 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें 124 बालक और 57 बालिकाएं शामिल हैं।

प्रशासन का संकल्प: हर जरूरतमंद को मिले सरकारी योजनाओं का लाभ
देहरादून जिला प्रशासन उत्तराखंड को बालश्रम और भिक्षावृत्ति मुक्त राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासन का नैतिक दायित्व है।



