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फैकल्टी की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से फैकल्टी की कमी बनी हुई है। इसका असर न केवल मेडिकल छात्रों की शिक्षा पर पड़ रहा है, बल्कि मरीजों को भी उच्च स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में गंभीर बीमारियों के इलाज में देरी हो रही है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
156 फैकल्टी पदों पर जल्द होगी भर्ती

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्त 156 पदों पर जल्द ही भर्ती प्रक्रिया पूरी होने वाली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मार्च 2024 में इन पदों को भरने के लिए राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजा गया था। अब यह भर्ती प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और एक माह के भीतर चयन सूची जारी होने की संभावना है।
किन विभागों में होगी भर्ती?
भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद भरे जाएंगे, जिनमें एनेस्थीसिया, एनाटॉमी, बायोकैमिस्ट्री, ब्लड बैंक, कम्युनिटी मेडिसिन, डेंटिस्ट्री, डर्मेटोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन, फोरेंसिक मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, स्त्री रोग, नेत्र रोग, अस्थि रोग, मनोरोग, रेडियोडायग्नोसिस, रेडियोथेरेपी और श्वसन चिकित्सा शामिल हैं।
मरीजों को मिलेगा राहत
चिकित्सा शिक्षा मंत्री के अनुसार, चयनित फैकल्टी की नियुक्ति होते ही राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी। इससे न केवल मेडिकल छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी, बल्कि मरीजों को भी उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की योजना
मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए हल्द्वानी, देहरादून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में न्यूरो फिजिशियन और गैस्ट्रोलॉजिस्ट के नए पद सृजित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके अलावा, पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने और पैरामेडिकल, टेक्नीशियन व अन्य नॉन-मेडिकल पदों को जल्द भरने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा सुधार?
इस कदम से उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों की हालत में कितना सुधार आएगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन अगर यह भर्ती प्रक्रिया सही समय पर पूरी होती है, तो मरीजों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।



