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पिथौरागढ़: फायर सीजन से पहले वनाग्नि रोकथाम की रणनीति, पुलिस ने संभाली कमान
वनाग्नि: एक विनाशकारी संकट
हर साल फायर सीजन के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होता है बल्कि वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। जंगलों में लगने वाली आग का मुख्य कारण मानव लापरवाही होती है, जैसे कि जलती बीड़ी-सिगरेट फेंकना या सूखी घास में चिंगारी पड़ना। समय रहते रोकथाम के उपाय न किए जाएं, तो यह आग बेकाबू होकर बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिथौरागढ़ पुलिस ने वनाग्नि से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है।

पुलिस की सक्रिय पहल
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देशन में पिथौरागढ़ जिले में वनाग्नि से बचाव और आग लगने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पुलिस उपाधीक्षक धारचुला संजय पाण्डे की अध्यक्षता में कोतवाली धारचुला में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में लिए गए अहम निर्णय
इस बैठक में एसएचओ कोतवाली धारचुला विजेन्द्र शाह, उपनिरीक्षक योगेश कुमार, हेड कांस्टेबल आन सिंह, फायर यूनिट प्रभारी केदार पांगती और धारचुला क्षेत्र के समस्त ग्राम प्रहरी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ग्राम प्रहरीयों को वनाग्नि से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई और उन्हें विशेष रूप से आग की घटनाओं पर त्वरित सूचना देने व पुलिस को सतर्क करने के निर्देश दिए गए।
वनाग्नि रोकने पर विशेष जोर
विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिलाया गया कि छोटी-छोटी चिंगारियां भी बड़े अग्निकांड का रूप ले सकती हैं, जिससे न केवल जंगलों को नुकसान होगा बल्कि वन्यजीवों के जीवन पर भी संकट आ सकता है। स्थानीय लोगों को इस विषय में सतर्क रहने और जिम्मेदारीपूर्वक व्यवहार करने का आह्वान किया गया।
आगे की रणनीति
पुलिस प्रशासन वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों में आग लगने से रोकने के लिए गश्त बढ़ाने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने के प्रयास तेज करेगा। इसके अलावा, फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं को भी हाई अलर्ट पर रखा जाएगा ताकि किसी भी संभावित आग की घटना पर त्वरित नियंत्रण किया जा सके।



