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जंगल की आग पर काबू पाकर बड़ी त्रासदी टाली, फायर टीम का साहसिक प्रयास
वनों में लगने वाली आग केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। बागेश्वर के काफलीगैर क्षेत्र में जंगल की आग तेजी से फैल रही थी और आसपास के आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचने वाली थी। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया जाता, तो यह एक बड़ी आपदा का रूप ले सकती थी।

फायर टीम ने चार घंटे की मशक्कत के बाद बुझाई आग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 फरवरी 2025 को दोपहर 2:46 बजे MDT सैट के माध्यम से फायर स्टेशन बागेश्वर को कठपुड़िया के पास जंगल में आग लगने की सूचना मिली। आग तेजी से घनी आबादी की ओर बढ़ रही थी, जिससे स्थानीय निवासियों की संपत्ति को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
जैसे ही सूचना मिली, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी के निर्देशन में फायर यूनिट मौके पर पहुंची। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि बुझाने का कार्य चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरा था। फायर टीम ने वॉटर टेंडर वाहनों की मदद से आग पर पानी डालना शुरू किया। टीम ने खुद को खतरे में डालकर चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग को पूरी तरह से बुझा दिया और स्थानीय घरों को सुरक्षित किया।
आग से हुआ नुकसान, लेकिन जनहानि नहीं
फायर ब्रिगेड की तत्परता के कारण बड़ी क्षति टल गई। हालांकि, आग की चपेट में आकर स्थानीय निवासी हरीश चंद्र पांडे के चार घास के लूटे जल गए। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। आग बुझाने के लिए 2 वॉटर टेंडर पानी का उपयोग किया गया।
फायर यूनिट की बहादुरी ने बचाई कई जिंदगियां
इस ऑपरेशन में फायर यूनिट के नवीन जोशी, चंद्र प्रकाश, रमेश जोशी, नीरज सिंह, रश्मि, पूजा, लोकेश, अंजना सुप्याल और रीता राणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साहसिक प्रयासों से एक बड़ी आपदा को टाल दिया गया।



