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गुमशुदा बच्चों के पुनर्वास के लिए पुलिस की अहम पहल
मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस प्रशासन द्वारा “ऑपरेशन मिलाप” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे कई बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने में सफलता मिली है। इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी होती हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड में दर्शन के लिए पहुंची एक नाबालिग लड़की को कोटद्वार की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने परिजनों से मिलाया।
केदारनाथ यात्रा के दौरान गुम हुई नाबालिग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 08 फरवरी 2025 की रात्रि को एक नाबालिग बालिका श्रीनगर कोतवाली पहुंची। बालिका ने पुलिस को बताया कि वह अकेले श्री केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए तेलंगाना से उत्तराखंड आई थी। उसे जानकारी नहीं थी कि वर्तमान में मंदिर के कपाट बंद हैं। लड़की उत्तराखंड में किसी को नहीं जानती थी और न ही उसके पास ठहरने की कोई उचित व्यवस्था थी।
पुलिस द्वारा बचाव कार्य और सुरक्षा इंतजाम
पुलिस द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से बाल कल्याण अधिकारी की उपस्थिति में लड़की से पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने अपना नाम शीतल (काल्पनिक नाम), उम्र 16 वर्ष, निवासी मन्नुर, थाना गुडैतनूर, तेलंगाना बताया। इसके बाद लड़की को सीडब्ल्यूसी पौड़ी के सुपुर्द किया गया और उसे कोटद्वार के राजकीय सम्प्रेक्षण गृह सिम्बलचौड़ में अस्थायी रूप से रखा गया।
नाबालिग के बारे में तेलंगाना पुलिस से मिली अहम जानकारी
जब एएचटीयू कोटद्वार टीम ने तेलंगाना पुलिस से संपर्क किया, तो जानकारी मिली कि यह नाबालिग एक पोक्सो केस की पीड़िता है और पिछले चार से पांच महीनों से लापता थी। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले ही स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी थी। लड़की के माता-पिता जीवित हैं और लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे।
परिजनों को सौंपी गई नाबालिग, काउंसलिंग भी हुई
दिनांक 17 फरवरी 2025 को नाबालिग के पिता और मामा एएचटीयू कार्यालय कोटद्वार पहुंचे। परिजनों ने बताया कि लड़की बिना बताए घर से निकल गई थी, जिसे ढूंढने के लिए उन्होंने कई प्रयास किए। पुलिस उपाधीक्षक कोटद्वार, एएचटीयू प्रभारी और सीडब्ल्यूसी सदस्यों की उपस्थिति में नाबालिग व उसके परिजनों की काउंसलिंग की गई और बाद में लड़की को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।
“ऑपरेशन मिलाप” की सफलता और पुलिस की भूमिका
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा “ऑपरेशन मिलाप” अभियान 15 फरवरी 2025 से एक माह के लिए चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य गुमशुदा बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाना है। इस ऑपरेशन के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में सभी थाना प्रभारी और एएचटीयू प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जनपदों में गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें उनके परिवार से मिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस अभियान के तहत कार्य करने वाली पुलिस टीम निम्नलिखित थी:
- महिला उपनिरीक्षक सुमनलता
- महिला आरक्षी विद्या मेहता
- आरक्षी मुकेश डोबरियाल
- आरक्षी सत्येंद्र लखेड़ा
समाज के लिए संदेश
गुमशुदा बच्चों की तलाश और पुनर्वास केवल पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इस दिशा में जागरूक रहना आवश्यक है। यदि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले या कोई बच्चा बेसहारा स्थिति में दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। ऐसे अभियानों की सफलता से न केवल परिवारों को राहत मिलती है, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी मजबूत होती है।



