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उत्तराखंड में मेडिकल कॉलेजों में 439 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की जाएगी, चिकित्सा शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने की दिशा में सरकार का अहम कदम
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी के चलते चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी के कारण मेडिकल छात्रों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही थी, जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा था। अब, सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।
मेडिकल कॉलेजों में 439 सहायक प्राध्यापकों की होगी नियुक्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के 439 रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा। इसके लिए राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेज दिया गया है।
चयन प्रक्रिया जल्द होगी शुरू
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। जल्द ही चयन बोर्ड इन रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा।
वर्गवार आरक्षण और विभागीय नियुक्तियां
- सामान्य श्रेणी – 218 पद
- अनुसूचित जाति – 112 पद
- अनुसूचित जनजाति – 09 पद
- ओबीसी – 68 पद
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 32 पद
इन भर्तियों के तहत मेडिकल कॉलेजों के 24 संकायों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से एनेस्थीसिया, एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, ब्लड बैंक, जनरल मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, ऑप्थेल्मोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, फार्माकोलॉजी, रेडियोथेरेपी आदि शामिल हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की योजना
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों में 100% फैकल्टी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की जा रही है। इसके अलावा, आचार्य (Professor) और सह-प्राध्यापक (Associate Professor) के पदों को भी जल्द भरने के निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद
इस फैसले से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से इलाज के स्तर में सुधार होगा और राज्य के मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।



