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गरीबी, असहाय स्थिति और पारिवारिक त्रासदी के कारण कई प्रतिभाशाली बेटियों की शिक्षा अधूरी रह जाती है। वे अपने सपनों को सिर्फ एक कल्पना मानकर जीवन जीने को मजबूर हो जाती हैं। लेकिन देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ ने इन बेटियों के सपनों को पंख देने की एक नई पहल की है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि कोई भी बालिका सिर्फ आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़े और आत्मनिर्भर बन सके।
देहरादून, 15 फरवरी 2025 – जिलाधिकारी सविन बंसल एवं मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने शुक्रवार को ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ का विधिवत शुभारंभ करते हुए सात जरूरतमंद बालिकाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की। इन बालिकाओं को कुल रु. 2,44,731 की धनराशि दी गई, जिससे वे उच्च शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।

इस योजना के तहत बालिकाओं का चयन बहु-विषयक समिति द्वारा किया गया ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे। चयनित बालिकाओं में अनाथ रोशनीं, आर्थिक रूप से कमजोर रोनक, शशांक, मीना, आकांक्षा, मानसी साहू और विधि शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न कोर्सों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
कौन-कौन सी बालिकाएं हुईं लाभान्वित?
- रोशनी (अनाथ) – श्री गुरू राम राय विश्वविद्यालय, देहरादून से बीएससी (योगिक साइंस) के लिए रु. 28,975
- रोनक (सहाय एवं गरीब) – राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से स्नातक हेतु रु. 25,000
- शशांक – राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से 12वीं कक्षा हेतु रु. 15,000
- मीना – पूजा मेकओवर, ठाकुरपुर चौक, डांडी, मोथरोवाला, देहरादून से ब्यूटीशियन कोर्स हेतु रु. 50,000
- आकांक्षा – राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से 12वीं हेतु रु. 15,000
- मानसी साहू – उत्तरांचल विश्वविद्यालय, देहरादून से पीएचडी अध्ययन हेतु रु. 52,500
- विधि – उत्तरांचल विश्वविद्यालय, देहरादून से होटल मैनेजमेंट कोर्स हेतु रु. 58,256
डीएम ने जताई संवेदनशीलता, बेटियों के हौसले की सराहना

इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं से उनके भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की और उनकी उम्मीदों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इन बेटियों के सपनों को साकार करने में हर संभव सहायता करेगा। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी और डीपीओ (आईसीडीएस) को इस प्रोजेक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग देने के लिए धन्यवाद भी दिया।
कैसे होगा बालिकाओं का चयन?
बालिकाओं के चयन के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं को अपनाया जाएगा:
- जनता दरबार एवं बहुउद्देशीय शिविरों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।
- जिला प्रोबेशन अधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी के अधीन बालिका गृहों में रह रही बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं का सर्वे किया जाएगा।
पहले भी कर चुके हैं सफल प्रयास
जिलाधिकारी सविन बंसल इससे पहले जनपद नैनीताल में भी इसी तरह की योजना चला चुके हैं, जहां उन्होंने 60 बालिकाओं को उच्च शिक्षा व कौशल विकास का अवसर दिया था। अब देहरादून में भी वे इसी मॉडल को लागू कर बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ क्यों है खास?
- गरीब, अनाथ और असहाय बालिकाओं को उच्च शिक्षा और कौशल विकास का अवसर
- आर्थिक तंगी के कारण बेटियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकारी सहायता
- पारदर्शी चयन प्रक्रिया और बहु-विषयक समिति की देखरेख में निष्पक्ष चयन
- बालिकाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
समाज के लिए संदेश – शिक्षा ही असली सशक्तिकरण है
‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है, बल्कि यह बेटियों को एक नए भविष्य की राह दिखा रहा है। समाज में उन परिवारों के लिए यह एक संदेश भी है कि बेटियों की शिक्षा बाधित न हो, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। इस योजना से प्रेरणा लेकर अन्य जिलों में भी इसी तरह की पहल शुरू करने की आवश्यकता है।
बेटियों के सपनों को मिलेगा नया आसमान
इस योजना के तहत देहरादून की अनाथ और आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों को सशक्त बनने का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन की यह पहल कई बेटियों के भविष्य को संवार सकती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकती है। यह समाज के लिए भी एक प्रेरणा है कि शिक्षा ही सबसे बड़ा सशक्तिकरण है, और बेटियों को आगे बढ़ाने में हर व्यक्ति को योगदान देना चाहिए।



