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उत्तराखंड में कृषि और बागवानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास, किसानों को मिलेंगे बड़े लाभ
देहरादून | कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रेस वार्ता में की बड़ी घोषणाएं
कृषि और बागवानी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। बढ़ती महंगाई, जलवायु परिवर्तन और कृषि में तकनीकी चुनौतियों के बीच किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहायता की सख्त जरूरत है। इन्हीं मुद्दों पर उत्तराखंड सरकार ने अपनी योजनाओं को विस्तार देने के लिए एक प्रेस वार्ता आयोजित की।
राज्य में कृषि एवं उद्यान विभाग की उपलब्धियां और योजनाएं
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से सरकार लगातार नई योजनाओं को लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और उधमसिंहनगर में अमृत सरोवर योजना के तहत मखाना और सिंघाड़े की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) को भी प्रोत्साहित करने के लिए आगामी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां औद्यानिक फसलों जैसे फल, सब्जी, मसाले, पुष्प, मशरूम और मौनपालन के लिए अनुकूल हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है।
सेब की खेती में बड़ा निवेश, 50,000 नए रोजगार सृजन की योजना
उत्तराखंड में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 808.79 करोड़ रुपये की लागत से 5000 हेक्टेयर में अति-सघन सेब बाग लगाने की योजना स्वीकृत की है। इस योजना के तहत किसानों को 60% तक की सरकारी सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य वर्तमान में 200 करोड़ रुपये के सेब व्यवसाय को 2000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना है।
मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष जहां 2 लाख सेब के पौधे लगाए गए थे, वहीं इस वर्ष 12 लाख पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा, किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को 60:40 के बजाय 90:10 कर दिया गया है।
कृषि में नई तकनीकों का समावेश और जैविक खेती को बढ़ावा
राज्य सरकार 50,000 से अधिक पॉलीहाउस स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसके लिए 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के तहत 16.56 करोड़ रुपये की कीवी योजना को मंजूरी दी गई है।
उत्तराखंड में केसर की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सेलाकुई में नियंत्रित वातावरण में पहली बार केसर का उत्पादन शुरू किया गया है। मौनपालकों के लिए भी अनुदान को 350 रुपये प्रति मौनबॉक्स से बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया गया है।
रुद्रप्रयाग में पौध घोटाला: दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
रुद्रप्रयाग जनपद में उद्यान विभाग द्वारा वर्ष 2020 में वितरित कागजी नींबू के पौधों में जंगली जामीर फल आने की शिकायतों की जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर अपर निदेशक डॉ. आर.के. सिंह और तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी योगेंद्र सिंह चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। दोनों अधिकारियों को आरोप पत्र जारी कर दिया गया है।
संबंधित नर्सरी के खिलाफ नर्सरी एक्ट के तहत कार्रवाई करने और काली सूची में डालने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा और इस प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बागवानी मिशन के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी
चौबटिया में केंद्र पोषित बागवानी मिशन योजना के तहत 671 लाख रुपये की लागत से सेब, अखरोट, खुबानी और प्लम की उन्नत खेती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र पौध उत्पादन, नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण और गुणवत्ता परीक्षण में सहायता करेगा, जिससे राज्य के बागवानों को लाभ मिलेगा।
स्टेट मिलेट मिशन और जैविक खेती का विस्तार
राज्य सरकार ने मिलेट्स (श्रीअन्न) फसलों के उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टेट मिलेट मिशन की शुरुआत की है। जैविक खेती को भी राज्य में व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का संकल्प: किसानों की आय दोगुनी और उत्तराखंड को कृषि हब बनाना
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य खेती और बागवानी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को एक कृषि और बागवानी हब के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
इस अवसर पर कृषि सचिव डॉ. एस.एन. पांडे, कृषि महानिदेशक रणवीर सिंह चौहान, कैप निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान, संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार, बागवानी निदेशक महेंद्र पाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



