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ऋषिकेश के उप जिला अस्पताल में लापरवाही की शिकायत पर डीएम सख्त, जांच के आदेश
अस्पताल में अव्यवस्था से मरीज परेशान, प्रशासन ने लिया संज्ञान
क्या अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है, या लापरवाही का शिकार हो रहे हैं? ऋषिकेश के उप जिला चिकित्सालय में 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के उपचार में लापरवाही की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों को समय पर देखभाल न मिलने, गंदगी और मेडिकल स्टाफ की अनदेखी जैसी गंभीर समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान गया है।

डीएम ने दिए जांच के आदेश, एसडीएम और सीएमओ पहुंचे निरीक्षण के लिए
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश में एक 78 वर्षीय महिला के उपचार में लापरवाही की शिकायत डीएम सविन बंसल तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने तुरंत संज्ञान लेते हुए एसडीएम ऋषिकेश और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को अस्पताल का निरीक्षण कर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
शिकायत के अनुसार, अस्पताल में सफाई कर्मचारियों की अनियमितता, नर्सिंग स्टाफ का अमानवीय व्यवहार, मरीजों की पट्टी समय पर न बदलना, मेडिकल वेस्ट का खुले में पड़ा होना और वार्ड की दयनीय स्थिति जैसी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। साथ ही, अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों पर स्टाफ की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप भी लगे हैं।

निरीक्षण में सामने आईं खामियां, अस्पताल प्रशासन को निर्देश
जांच टीम ने अस्पताल में जाकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था खराब पाई गई, जिसके बाद सीएमएस को नियमित रूप से वार्ड, ओटी, लेबर रूम और आईसीयू की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों को ड्रेस कोड का पालन करने और आईकार्ड पहनने के लिए निर्देशित किया गया।
इसके अलावा, अस्पताल में भीड़ नियंत्रण के लिए मरीज के साथ केवल एक अटेंडेंट को अनुमति देने और अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई। चारधाम यात्रा को देखते हुए अस्पताल में पहले से ही व्यवस्थाएं बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आगे क्या? दोषी कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
डीएम ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम और सीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने की जरूरत है। इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। सवाल यह उठता है कि क्या आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार देखने को मिलेगा या ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाएंगी?



