Monday, February 16, 2026
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उत्तराखंड के 13 गांवों में गूंजेगी देववाणी संस्कृत, सरकार ने घोषित किए ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’

आप को बता दे

क्या आधुनिक भारत में संस्कृत फिर से जीवंत हो पाएगी? उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया!

संस्कृत, जिसे देववाणी कहा जाता है, आज के समय में केवल धार्मिक अनुष्ठानों और ग्रंथों तक सीमित होती जा रही है। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने इस भाषा को पुनर्जीवित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में अब 13 गांवों को आदर्श संस्कृत ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दैनिक जीवन में संस्कृत भाषा का प्रयोग होगा।

संस्कृत को बढ़ावा देने की नई पहल

उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक गांव को आदर्श संस्कृत ग्राम घोषित किया है। इन गांवों में सरकारी कामकाज, आपसी बातचीत, सूचना पट्ट और संकेतक सभी संस्कृत में होंगे। इसके लिए राज्य में प्रशिक्षित संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को इस भाषा को सीखने और अपनाने में सहायता मिले।

किन गांवों को मिला ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ का दर्जा?

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, निम्नलिखित गांवों को आदर्श संस्कृत ग्राम घोषित किया गया है:

  • हरिद्वार: बहादराबाद ब्लॉक – नूरपुर पंजनहेड़ी
  • देहरादून: डोईवाला ब्लॉक – भोगपुर
  • उत्तरकाशी: मोरी ब्लॉक – कोटगांव
  • चमोली: कर्णप्रयाग ब्लॉक – डिम्मर
  • पौड़ी: खिर्सू ब्लॉक – गोदा
  • रुद्रप्रयाग: अगस्तमुनि ब्लॉक – बैजी
  • टिहरी: प्रतापनगर ब्लॉक – मुखेम
  • नैनीताल: कोटाबाग ब्लॉक – पाण्डे गांव
  • अल्मोड़ा: ताड़ीखेत ब्लॉक – जैंती
  • चंपावत: खर्ककार्की
  • पिथौरागढ़: मूनाकोट ब्लॉक – उर्ग
  • बागेश्वर: शेरी
  • ऊधमसिंह नगर: खटीमा ब्लॉक – नगला तराई

संस्कृत ग्रामों में क्या होंगे खास बदलाव?

इन गांवों में संस्कृत को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए सरकार ने विशेष योजनाएं बनाई हैं:

  • गांवों में सूचना पट्ट, दुकानों के नाम, सरकारी निर्देश संस्कृत में होंगे।
  • ग्रामीणों को संस्कृत सिखाने के लिए संस्कृत प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में वेद, पुराण और उपनिषदों की ऋचाओं का पाठ किया जाएगा।
  • महिलाओं को संस्कृत में भजन और गीत गाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों को संस्कृत शिक्षा में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

क्या कह रहे हैं सरकार के प्रतिनिधि?

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस फैसले पर कहा,
“संस्कृत राज्य की द्वितीय राजभाषा है और इसके संरक्षण के लिए यह पहल की गई है। इन गांवों में संस्कृत को पुनर्जीवित किया जाएगा और नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा से जोड़ा जाएगा।”

संस्कृत का भविष्य: क्या यह कदम असरदार होगा?

संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, अगर इस योजना को सही तरह से लागू किया गया, तो यह संस्कृत के पुनर्जागरण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

 

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