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गुजरोवाली में ‘हिंदू सनातन हाट’ का उद्घाटन: स्थानीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं
एक ऐसे देश में जहाँ विविधता में एकता की बात की जाती है, देहरादून के गुज़रूवाली में एक नई पहल ने इस सवाल को जन्म दिया है। ‘हिंदू सनातन हाट’ की शुरुआत, जहाँ केवल हिंदुओं को ही व्यापार करने की अनुमति है, कई सवाल खड़े करती है। क्या यह कदम समाज को और विभाजित करेगा, या यह केवल एक समुदाय विशेष की ज़रूरतों को पूरा करने का प्रयास है? आईये इस खबर पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून के गुजरोवाली क्षेत्र में ‘हिंदू सनातन हाट’ की शुरुआत की गई है, जिसे केवल हिंदू व्यापारियों और ग्राहकों के लिए स्थापित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाट की स्थापना काली सेना के नेतृत्व में की गई है, जिसका दावा है कि यह पहल सनातन धर्म के अनुयायियों को व्यापार करने के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के लिए की गई है।
स्थानीय संगठन के सदस्य भूपेश जोशी ने इस हाट को शुरू करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि, “गाय की पूजा करने वाले और गाय को खाने वाले एक साथ नहीं रह सकते। इसलिए हमने अलग हाट की शुरुआत की है, जहाँ केवल सनातनी व्यापारी ही रोजगार कर सकेंगे।”
इस पहल को लेकर स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाट के आयोजकों का कहना है कि क्षेत्र में भविष्य में केवल ‘सनातनी हाट’ ही स्थापित की जाएंगी ।
पूर्व प्रधान राजन सिंह पंवार के अनुसार, इस हाट की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि, “कुछ खास समुदायों द्वारा जानबूझकर गलत व्यवहार किया जाता है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को असुविधा होती है।” हालाँकि, इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थानीय व्यापारियों की राय: इस हाट में व्यापार कर रहे कई स्थानीय दुकानदारों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया है। एक व्यापारी राहुल का कहना है कि, “हमने देखा है कि कुछ लोग खाने-पीने की चीजों में अशुद्धता मिलाते हैं, जिससे सनातनी लोग असहज महसूस करते हैं। यह हाट हमारे लिए सुरक्षित व्यापार का एक नया अवसर लेकर आई है।”
वहीं, कुछ अन्य नागरिकों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आधार पर बने बाजारों से समाज में और अधिक दूरियाँ पैदा हो सकती हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि, “हमें हर किसी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। व्यापार और धर्म को अलग रखना ही बेहतर होगा।”
प्रशासन की भूमिका और भविष्य की संभावनाएँ: नगर निगम और प्रशासन की ओर से अब तक इस हाट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यदि यह हाट लंबे समय तक चलती है और इसमें अन्य समुदायों को अनुमति नहीं दी जाती, तो यह कानूनी विवाद का कारण भी बन सकता है।
फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि गुजरावाली का ‘हिंदू सनातन हाट’ क्षेत्रीय व्यापार को कैसे प्रभावित करता है और प्रशासन इस पर क्या निर्णय लेता है।



