Monday, February 16, 2026
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 देहरादून: सरकारी स्कूलों में नहीं बैठेगा अब कोई बच्चा जमीन पर, ‘उत्कर्ष’ प्रोजेक्ट के तहत 250 स्कूलों को 25 फरवरी तक मिलेगा फर्नीचर

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क्या सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं?

सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी हमेशा से एक गंभीर समस्या रही है। किताबों और शिक्षकों की कमी के साथ-साथ फर्नीचर की अनुपलब्धता के कारण कई बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनकी सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि पढ़ाई में भी बाधा आती है। लेकिन अब इस स्थिति को बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

डीएम सविन बंसल के ‘उत्कर्ष’ प्रोजेक्ट से बदलेगी तस्वीर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने और बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण देने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा ‘उत्कर्ष’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के 250 स्कूलों को 25 फरवरी तक फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल में ओएनजीसी और हुडको जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग मिल रहा है

हुडको और ओएनजीसी का योगदान

रिपोर्ट के मुताबिक, हुडको स्कूलों में एलईडी स्क्रीन और अन्य स्मार्ट लर्निंग उपकरणों के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कर रहा है, जबकि ओएनजीसी 1.5 करोड़ रुपये की लागत से फर्नीचर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था में सहयोग दे रहा है।

जल्द ही स्मार्ट क्लासेस की होगी शुरुआत

डीएम बंसल का उद्देश्य सिर्फ फर्नीचर ही नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा को भी बढ़ावा देना है। योजना के अनुसार, जल्द ही स्कूलों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की जाएगी। हुडको पर 3.5 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है और इसके सफल क्रियान्वयन के बाद सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिलेगा।

बच्चों को मिलेगी बहुआयामी शिक्षा

सरकारी स्कूलों में न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, बल्कि बच्चों को समग्र शिक्षा प्रदान करने पर भी जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में न्यूज़पेपर, मैगज़ीन, शब्दकोश और महापुरुषों की जीवनियों को अनिवार्य किया गया है ताकि बच्चे शिक्षाविदों और इतिहास से प्रेरणा ले सकें। इसके साथ ही, खेल और मनोरंजन को भी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया जा रहा है ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।

स्वच्छता और पोषण पर भी विशेष ध्यान

जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी ने स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालयों की सफाई, पानी की टंकियों की मरम्मत और पोषक भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक धनराशि आवंटित की गई है ताकि सुविधाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

सरकारी स्कूलों में बदलाव की उम्मीद

‘उत्कर्ष’ प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे प्रयासों से सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। यह योजना बच्चों को एक सुरक्षित, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शैक्षिक माहौल देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना होगा कि 25 फरवरी तक लक्ष्य कितना पूरा हो पाता है और किस हद तक यह योजना शिक्षा व्यवस्था में बदलाव ला सकती है।

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