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चुनाव में निष्पक्षता और सुरक्षा की अहम भूमिका
लोकतंत्र की सफलता का आधार निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव हैं। हर चुनाव में प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होती है कि मतदाता बिना किसी डर और दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। हालांकि, चुनाव के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन, अवैध गतिविधियां और असामाजिक तत्वों की सक्रियता मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन को नवीनतम तकनीकों और मजबूत रणनीतियों का सहारा लेना पड़ता है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड के चंपावत जिले ने इस दिशा में एक मिसाल कायम की।

चंपावत में निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा सामान्य निर्वाचन 2024 के दौरान चंपावत जनपद में पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के नेतृत्व में चुनाव संबंधी आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया गया। निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा कई नवीन और प्रभावी पहल की गईं, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सका।
तकनीकी नवाचार और प्रशासनिक रणनीतियां
चंपावत पुलिस ने चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए:
- ड्रोन सर्विलांस टीमों का गठन: जनपद के सभी थानों में कुल आठ ड्रोन सर्विलांस टीमें गठित की गईं, जो ड्रोन के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर नजर रख रही थीं।
- सेटेलाइट फोन का उपयोग: प्रत्येक शैडो एरिया के बूथों में सेटेलाइट फोन लगाए गए, जिससे त्वरित सूचना का आदान-प्रदान संभव हुआ।
- अस्थायी निर्वाचन वेबसाइट: मतदाताओं को जागरूक करने के लिए एक अस्थायी निर्वाचन वेबसाइट बनाई गई, जिसमें प्रत्येक बूथ की गूगल मैपिंग सहित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
- जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम: निर्वाचन संबंधी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाए गए, जिससे उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी गई।
राज्यपाल ने किया सम्मानित
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक अजय गणपति को ‘स्टेट अवार्ड फॉर बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिसेस’ से सम्मानित किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सम्मान चंपावत पुलिस की कार्यकुशलता, कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए दिया गया।
चंपावत में चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाए रखने की इस पहल ने प्रशासनिक नवाचार और कर्तव्यपरायणता की मिसाल पेश की है। निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं, और इस तरह की पहलें भविष्य में भी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होंगी।



