आप को बता दे
पिथौरागढ़: कानून-व्यवस्था की सख्त निगरानी, पुलिस उपाधीक्षक का औचक निरीक्षण
क्या पुलिस व्यवस्था वाकई मजबूत है? औचक निरीक्षण से सामने आईं अहम बातें
पुलिस प्रशासन की चुस्ती और अपराध नियंत्रण की रणनीति का असली परीक्षण तभी होता है जब अचानक निरीक्षण किया जाता है। यह न केवल सुरक्षा व्यवस्था को परखने का जरिया होता है, बल्कि पुलिसकर्मियों को अनुशासन और जिम्मेदारी का एहसास भी कराता है। अपराध की बढ़ती घटनाओं, सड़क दुर्घटनाओं और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का सक्रिय रहना जरूरी है। इसी दिशा में पिथौरागढ़ के पुलिस उपाधीक्षक ने थाना व चौकी स्तर पर औचक निरीक्षण किया, जिससे कई अहम बिंदु सामने आए।

थानों का निरीक्षण: सुरक्षा और अनुशासन की पड़ताल
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस उपाधीक्षक पिथौरागढ़ ने थाना गंगोलीहाट, थाना बेरीनाग, चौकी घाट और चौकी पनार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया गया, जिसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
✅ थाना कार्यालय और अभिलेखों का रखरखाव:
थाने में दर्ज मामलों, आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की स्थिति की समीक्षा की गई।
✅ आर्म्स-एम्युनेशन एवं आपदा उपकरणों की स्थिति:
सुरक्षा उपकरणों और हथियारों की उपलब्धता तथा उनकी स्थिति का निरीक्षण किया गया।
✅ सी.सी.टी.एन.एस. सिस्टम की कार्यप्रणाली:
अपराधों की ऑनलाइन रिकॉर्डिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली की जांच की गई।
✅ थाना परिसर, भोजनालय और बैरक की स्वच्छता:
पुलिसकर्मियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का अवलोकन किया गया।
अपराध नियंत्रण पर सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान, पुलिस उपाधीक्षक ने थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
➡ हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर कड़ी नजर रखें:
हर थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त निवारक कार्रवाई करने के आदेश दिए गए।
➡ सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम:
सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित वाहन चेकिंग के निर्देश दिए गए।
🔹 ओवरलोडिंग
🔹 ड्रिंक एंड ड्राइव
🔹 ओवर स्पीडिंग
इन सभी मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
➡ अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई:
🔹 नशे की तस्करी (चरस, स्मैक, शराब)
🔹 अवैध खनन
इनके खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
पुलिसकर्मियों की समस्याओं पर चर्चा
निरीक्षण के दौरान पुलिस कर्मचारियों का सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें उनकी व्यक्तिगत और विभागीय समस्याओं पर चर्चा की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि उनकी शिकायतों का त्वरित समाधान हो।
➡ सभी कर्मचारियों को साफ-सुथरी वर्दी पहनने, अनुशासन बनाए रखने और कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने के लिए निर्देशित किया गया।
क्या यह निरीक्षण अपराध नियंत्रण में कारगर होगा?
औचक निरीक्षण से पुलिस की कार्यशैली परखने का मौका मिलता है, लेकिन असली चुनौती इसे लगातार लागू करने की है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह इन निरीक्षणों को नियमित करे और अपराध नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए।
➡ जनता की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह पुलिस को सहयोग दे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत दे।



