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गढ़वाल मंडल लैण्ड फ्रॉड समिति की बैठक में 48 मामलों पर चर्चा, 23 का निस्तारण, भूमि विवादों में पारदर्शिता और कार्रवाई के निर्देश
भूमि धोखाधड़ी और अवैध खरीद-फरोख्त जैसे मुद्दे गंभीर सामाजिक और कानूनी समस्याएं बन चुके हैं। ये विवाद न केवल संपत्ति के मालिकों को वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं को भी जटिल बनाते हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में विशेष लैण्ड फ्रॉड समन्वय समितियों का गठन किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गढ़वाल मंडल लैण्ड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक दिनांक 10 जनवरी 2025 को आयुक्त विनय शंकर पांडे की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में भूमि विवाद और धोखाधड़ी से संबंधित कुल 48 मामलों पर चर्चा की गई। इनमें से 23 मामलों का निस्तारण संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जांच रिपोर्टों और शिकायतकर्ताओं को सुनने के आधार पर किया गया।
आयुक्त ने बताया कि लैण्ड फ्रॉड समिति का गठन 2014 में राज्य में भूमि धोखाधड़ी और अवैध लेनदेन पर नियंत्रण के लिए किया गया था। यह समिति संदिग्ध मामलों में एफआईआर दर्ज करने या एसआईटी के गठन के लिए पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल को संदर्भित करती है।
आयुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि किसी भी भूमि विवाद की जांच पारदर्शिता और न्याय की दृष्टि से की जाए। मामलों को लैण्ड फ्रॉड समिति के पास भेजे बिना एफआईआर दर्ज न की जाए। विशेष परिस्थितियों में, कानून और शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्थानीय थानों में दर्ज मामलों का जांच कार्य दूसरे थानों को सौंपा जाए।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल, अपर आयुक्त (प्रशासन), वन संरक्षक यमुना वृत्त, नगर आयुक्त ऋषिकेश, और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पिछले एक वर्ष में दर्ज सभी भूमि विवादों की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर समिति को प्रस्तुत की जाए।



