पूरी ख़बर देखने के लिए नीचे फ़ोटो पर क्लिक करें 👇
आप को बता दे
उत्तराखंड में प्रशासनिक पुनर्गठन और बेहतर प्रबंधन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। प्रदेश में कई दूरस्थ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं और प्रशासनिक सेवाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं। इसी संदर्भ में पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल खाल क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग उठाई है।
जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग: शहीद जसवंत सिंह रावत के नाम पर नए जिले की मांग तेज
रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल ब्लॉक और आसपास के छह ब्लॉकों को मिलाकर एक नए जिले के गठन की मांग जोर पकड़ रही है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पौड़ी गढ़वाल का जिला मुख्यालय अत्यधिक दूरस्थ होने के कारण उन्हें प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
पूर्व एवं सेवानिवृत्त सैनिकों का मानना है कि छह ब्लॉक— पौड़ी जिले के नैनीडांडा, रिखणीखाल, बीरोंखाल, पोखड़ा, थैलीसैंण विकासखंडों के साथ कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लाक को मिलाकर नया जसवंतगढ़ जिला बनाने से क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सेवाओं में सुधार होगा। स्थानीय निवासियों और पूर्व सैनिकों का मानना है कि यह कदम शहीद जसवंत सिंह रावत के सम्मान को अमर करेगा, जिन्होंने 1962 के युद्ध में चीन के 300 सैनिकों को मार गिराया और अपनी जान कुर्बान कर दी। नए जिले के गठन से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि वर्तमान में जिला मुख्यालय अत्यधिक दूरस्थ होने के कारण प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। नए जिले के गठन से प्रशासनिक सेवाएं अधिक सुलभ होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ होगा और क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी। इसके अलावा, सुरक्षा और कानून व्यवस्था में भी सुधार होगा, जिससे समाज में शांति और स्थिरता बनी रहेगी।
आंदोलन को मिल रहा समर्थन
इस मांग के समर्थन में पूर्व सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए हैं। हाल ही में आयोजित संवाद वार्ता में सैनिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। उनका कहना है कि जसवंत सिंह रावत का योगदान केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रेरणा है जो पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
सरकार से अपेक्षाएं
स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों ने सरकार से अपील की है कि जसवंतगढ़ जिले का गठन कर शहीद के योगदान को सम्मानित किया जाए। उनका मानना है कि नए जिले के निर्माण से प्रशासनिक इकाइयों को छोटे स्तर पर बांटकर स्थानीय लोगों को राहत दी जा सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि जसवंतगढ़ जिला बनाने की यह मांग कितना समर्थन पाती है और सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। फिलहाल, क्षेत्रीय लोग और पूर्व सैनिक इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं।




