आप को बता दे
बेटियों के ड्रॉपआउट रोकने और भविष्य संवारने के लिए नई योजनाओं की घोषणा: देहरादून में जिलास्तरीय टास्क फोर्स बैठक
रिपोर्ट के अनुसार, बेटियों के लिए व्यवसायिक कोर्स, शिक्षा और सुरक्षा योजनाओं पर विशेष फोकस
बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। गरीबी, जागरूकता की कमी और सामाजिक दबाव के चलते हजारों बेटियाँ 10 से 18 वर्ष की आयु में स्कूल छोड़ देती हैं। इसका असर केवल उनके जीवन पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की उन्नति पर पड़ता है। इन मुद्दों को हल करने के लिए प्रशासन ने अब कड़े और ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है।

देहरादून, 17 दिसंबर 2024 — प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित की गई। बैठक में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग द्वारा ड्रॉपआउट बेटियों को शिक्षा और व्यवसायिक प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को स्वीकृति दी गई।
बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि घर-घर जाकर सर्वे किया जाए और 10-18 वर्ष की ड्रॉपआउट बेटियों की पहचान की जाए। उनके स्कूल छोड़ने के कारणों की पड़ताल कर समाधान की दिशा में ठोस कार्य किया जाएगा। सर्वे में चिन्हित बेटियों का स्कूल में पुनः प्रवेश कराने के साथ उनकी एक वर्ष की स्कूल फीस सरकार द्वारा जमा कराई जाएगी। साथ ही उन्हें स्कूल ड्रेस, किताबें, स्टेशनरी और स्वच्छता किट दी जाएंगी।

इसके अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर और इच्छुक बालिकाओं को आर्किटेक्चर, मेडिकल साइंस, कंप्यूटर और अन्य व्यवसायिक कोर्स के लिए फंडिंग प्रदान करने की योजना पर भी चर्चा हुई। बेटियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए असुरक्षित स्थानों का चिन्हिकरण कर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया।
प्रमुख योजनाएं और निर्णय:
- ड्रॉपआउट बेटियों की शिक्षा पर जोर:
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर सर्वे कर ड्रॉपआउट बेटियों को पुनः स्कूल से जोड़ा जाएगा।
- आर्थिक कारणों से शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए सरकारी सहायता की घोषणा।
- व्यवसायिक प्रशिक्षण की पहल:
- इच्छुक बालिकाओं को व्यवसायिक कोर्स (आर्किटेक्चर, मेडिकल, कंप्यूटर आदि) में दाखिला दिलाने हेतु फंडिंग।
- सुरक्षा और जागरूकता अभियान:
- कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक और वॉल पेंटिंग अभियान।
- सार्वजनिक स्थलों पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से जुड़े संदेश के लिए प्रशिक्षित बालिकाओं से पेंटिंग करवाने की योजना।
- प्रेरणा और मोटिवेशन कार्यक्रम:
- 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राओं को एफआरआई, साइंस सिटी और देहरादून चिड़ियाघर का शैक्षणिक भ्रमण।
- मोटिवेशनल मूवी और पोषण अभियान की स्वीकृति।
- कामकाजी माताओं के लिए ‘पालना’ योजना:
- छोटे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा हेतु डे-केयर क्रैच सुविधा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, मुख्य शिक्षा अधिकारी, महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



