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गुमशुदा बच्चों की तलाश और पुनर्वास के लिए ऑपरेशन स्माइल: बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य की ओर एक कदम
बच्चों का गुम हो जाना केवल उनके परिवारों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें उनके परिवारों से जोड़ने का प्रयास बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड में चलाए जा रहे ऑपरेशन स्माइल अभियान के तहत गुमशुदा बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की तलाश और पुनर्वास का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनपद टिहरी गढ़वाल में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल के निर्देशन में और अपर पुलिस अधीक्षक जे.आर. जोशी के मार्गदर्शन में ऑपरेशन स्माइल टीम ने गुमशुदा बच्चों की खोजबीन में सराहनीय काम किया। नोडल अधिकारी ओशिन जोशी के पर्यवेक्षण में यह अभियान जारी है।
दिनांक 10 दिसंबर 2024 को ऑपरेशन स्माइल टीम ने टिहरी गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे जानकी पुल, अस्था पथ, नाव घाट और होटल/धर्मशालाओं में गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश की। इसी क्रम में ढाल वाला क्षेत्र में चेकिंग के दौरान दो नाबालिग बच्चे काम करते हुए पाए गए। पुलिस को देखकर बच्चों ने नजरें चुराने की कोशिश की, जिससे उन पर संदेह हुआ।
पूछताछ के दौरान बच्चों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और घर की खराब पारिवारिक स्थिति के कारण काम की तलाश में ऋषिकेश आए थे। बच्चों के परिजनों से संपर्क किया गया, जिन्होंने बताया कि ये बच्चे एक हफ्ते से घर से लापता थे। परिजनों ने बताया कि बच्चों के मामा देहरादून में रहते हैं। इसके बाद बच्चों को उनके मामा के सुपुर्द किया गया।
बच्चों का विवरण:
- कौशल कुमार, उम्र 15 वर्ष, निवासी ग्राम जलालाबाद, थाना रूपापुर, जिला हरदोई, उत्तर प्रदेश।
- राहुल, उम्र 16 वर्ष, निवासी उपरोक्त।
ऑपरेशन स्माइल टीम का योगदान:
इस कार्य में उपनिरीक्षक अनिरुद्ध मैठाणी, हेड कांस्टेबल निशांत रामोला और इंदु रानी की भूमिका सराहनीय रही।
ऑपरेशन स्माइल अभियान उत्तराखंड पुलिस की एक प्रशंसनीय पहल है, जो गुमशुदा बच्चों और उनके परिवारों को पुनः जोड़ने का प्रयास कर रही है। ऐसे प्रयास समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाने में मदद करते हैं।



