Thursday, February 19, 2026
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चंपावत: थाना पंचेश्वर ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर आयोजित की गोष्ठी, प्रमुख मंदिरों के प्रबंधकों को दिए दिशा-निर्देश

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धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर कोतवाली पंचेश्वर में गोष्ठी आयोजित

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा आज के समय में एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है, विशेषकर जब इन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। चंपावत जिले के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। धार्मिक स्थलों में सुरक्षा उपाय न केवल अपराधों को रोकने में मदद करते हैं, बल्कि श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने जनपद चंपावत में स्थित सभी प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के अनुपालन में दिनांक 5 दिसंबर 2024 को थाना कोतवाली पंचेश्वर क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण मंदिरों जैसे अखिल तारिणी मंदिर (दिगालीचोड़), दूधाधारी मंदिर (खालगड़ा), चौखाम देवता मंदिर (चमदेवल), माँ भगवती मंदिर (मडलक), और नागार्जुन मंदिर (नगरू घाट) के प्रबंधकों, समिति सदस्यों, और पुजारियों के साथ एक गोष्ठी आयोजित की गई।

गोष्ठी के मुख्य बिंदु
गोष्ठी के दौरान मंदिर प्रबंधकों और समिति सदस्यों को धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:

  1. CCTV कैमरों का अनिवार्य इंस्टॉलेशन – सभी मंदिरों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से।
  2. मंदिर मेलों में कानून व्यवस्था बनाए रखना – श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए।
  3. दान पात्रों, चढ़ावे और घंटियों की सुरक्षा – चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए।
  4. अपरिचित व्यक्तियों का सत्यापन – मंदिर परिसरों के आसपास रहने वाले व्यक्तियों का पुलिस सत्यापन।
  5. महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस तक पहुंचाना – संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल साझा करना।

सुरक्षा जागरूकता पर जोर
इस गोष्ठी का उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, बल्कि मंदिर प्रबंधकों और स्थानीय समुदाय के बीच सुरक्षा जागरूकता को भी बढ़ावा देना था। मंदिर समिति सदस्यों ने पुलिस के प्रयासों की सराहना की और सुरक्षा उपायों को लागू करने में सहयोग का आश्वासन दिया।

यह पहल धार्मिक स्थलों को सुरक्षित और संरक्षित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। पुलिस प्रशासन का यह प्रयास न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी भरोसा प्रदान करेगा। “मित्रता, सेवा, सुरक्षा” के सिद्धांत के तहत यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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