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आपदा प्रबंधन की भूमिका: स्थानीय स्तर पर तैयारी और पुनर्प्राप्ति की आवश्यकता
प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम और इसके विनाशकारी प्रभावों को देखते हुए, आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपदाओं से बचाव और पुनर्प्राप्ति में स्थानीय संसाधनों और क्षमताओं को शामिल करना दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकता है। इसके लिए पंचायत स्तर तक जागरूकता और क्षमता निर्माण पर जोर देना जरूरी है।

कार्यशाला का आयोजन और प्रमुख बिंदु
देहरादून, 28 नवंबर 2024 (जि.सू.का): डॉ. आरएस टोलिया प्रशासन अकादमी, नैनीताल के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत दो दिवसीय “आपदा जोखिम न्यूनीकरण तैयारी और दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति” पर कार्यशाला का आयोजन जनपद स्थित होटल द्रोण में किया गया।
कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में अपर सचिव आपदा प्रबंधन आनंद स्वरूप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि पर्यावरणविद् और पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक ने आपदा प्रबंधन के विविध पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। जिलाधिकारी चंपावत नवनीत पांडे, जिलाधिकारी अल्मोड़ा आलोक पांडे और पूर्व एडीजीएम मौसम विभाग आनंद शर्मा सहित अन्य विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
प्रमुख विचार और चर्चाएं
- विशिष्ट अतिथि प्रो. शेखर पाठक ने आपदाओं के बढ़ते खतरों और उनकी रोकथाम में सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
- मुख्य अतिथि आनंद स्वरूप ने पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने और स्थानीय समुदाय को शामिल करने की आवश्यकता बताई।
- प्रथम तकनीकी सत्र में राजकुमार नेगी (यूएसडीएमए), प्रदीप मेहता (यूएनडीपी), और पूरण बर्थवाल (पीएसआई) ने अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की भागीदारी
कार्यशाला में 125 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी, अभियंता, वैज्ञानिक, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्रोफेसर, और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।
कार्यक्रम निदेशक डॉ. मंजू पांडे ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की और इसके महत्व को रेखांकित किया। डॉ. ओम प्रकाश, प्रभारी आपदा प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। अतिथियों को शाल, पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए।



