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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: सामूहिक प्रयासों से सामाजिक बुराई को समाप्त करने की पहल
बाल विवाह, एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन करती है बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डालती है। यह प्रथा बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन के अवसरों से वंचित कर देती है। इसी समस्या के उन्मूलन के लिए “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत जागरूकता और सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।
विकास भवन सभागार, पिथौरागढ़ में बैठक आयोजित
सूत्रों के अनुसार, बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आज विकास भवन सभागार, पिथौरागढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अर्पण संस्था की सचिव रेनू ठाकुर ने की। इस कार्यक्रम में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम से हेड कांस्टेबल तारा बोनाल और हेड कांस्टेबल दीपक खनका ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने बाल विवाह को रोकने के लिए शपथ ली और प्रभावी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष विभा यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रमुख निर्णय और प्रतिबद्धताएं
बैठक में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। उपस्थित सदस्यों ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूर्ण समर्थन और प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अभियान का उद्देश्य है कि बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन का अधिकार सुनिश्चित करते हुए इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जाए। समाज के हर वर्ग को इस प्रयास में जोड़कर बाल विवाह के उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।



