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गुमशुदा बच्चों की तलाश में सफल ऑपरेशन स्माइल: हरदोई के किशोर को परिजनों से मिलाया गया
गुमशुदा बच्चों की समस्या समाज के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। हर साल हजारों बच्चे अपने घरों से लापता हो जाते हैं, जिनमें से कई मानव तस्करी, बाल मजदूरी, या अन्य खतरनाक परिस्थितियों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में, गुमशुदा बच्चों की तलाश और उनके पुनर्वास के लिए शुरू किए गए अभियानों की सफलता समाज में उम्मीद की किरण जगाती है। उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन स्माइल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समाचार विवरण:
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड, देहरादून के दिशा-निर्देशों के तहत 15 अक्टूबर 2024 से 15 दिसंबर 2024 तक राज्यभर में ऑपरेशन स्माइल अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत टिहरी गढ़वाल पुलिस ने एक गुमशुदा किशोर को खोजकर उसके परिजनों से मिलाने में सफलता प्राप्त की।
दिनांक 22 नवंबर 2024 को ऑपरेशन स्माइल टीम ने थाना मुनि की रेती क्षेत्र में खोजबीन के दौरान आस्था पथ, जानकी पुल के पास एक बालक को अकेला बैठा पाया। पूछताछ के दौरान वह घबराने लगा और भागने की कोशिश की। टीम ने उसे रोका और बातचीत की, लेकिन वह स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था।
बालक की तलाशी में एक मोबाइल फोन मिला, जिसके माध्यम से उसके पिता का नंबर प्राप्त किया गया। जब टीम ने संपर्क किया, तो पता चला कि बालक का नाम शिवा (17 वर्ष) है, जो हरदोई के ललतापुरवा मोहल्ले से लापता था। उसके पिता महेश गुप्ता ने बताया कि शिवा दो दिन पहले बिना बताए घर से चला गया था। उन्होंने यह भी बताया कि वे शारीरिक रूप से अक्षम हैं और अपने बेटे को लेकर अत्यधिक चिंतित थे।
टीम ने बालक के पिता को सूचित किया कि उनका बेटा ऋषिकेश में सुरक्षित है। शाम 6 बजे शिवा की मां मुनि की रेती पहुंचीं और अपने बेटे को पाकर बेहद भावुक हो गईं। बालक को विधिवत उनके सुपुर्द कर दिया गया।
बच्चे का विवरण:
- नाम: शिवा
- पिता का नाम: महेश गुप्ता
- निवासी: ललतापुरवा मोहल्ला, शिवपाल, जनपद हरदोई, उत्तर प्रदेश
- आयु: 17 वर्ष
टीम का योगदान:
गुमशुदा बालक को खोजने और परिजनों से मिलाने में ऑपरेशन स्माइल टीम, टिहरी गढ़वाल ने प्रमुख भूमिका निभाई। टीम में निम्न अधिकारी शामिल थे:
- टीम प्रभारी: एसआई अनिरुद्ध मैठाणी
- हेड कांस्टेबल: अनिल कुमार, भरत धनई, निशांत रमोला
- महिला कांस्टेबल: इंदु
यह अभियान गुमशुदा बच्चों के पुनर्वास की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है और समाज में सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहा है।



