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उत्तराखंड में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब यह खबर आई कि राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बेटे, सुयेश रावत, को टिहरी झील पर क्रूज संचालन के लिए चुना गया है। इस चयन को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया में नियमों का खुला उल्लंघन किया गया है, जो साफ तौर पर कहता है कि किसी भी अधिकारी के परिवार के सदस्य उसी क्षेत्र में काम नहीं कर सकते हैं जहां उनका सीधा प्रभाव हो सकता है।
कांग्रेस का आरोप: पारदर्शिता की कमी और भाई-भतीजावाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि, “यह मामला केवल पारदर्शिता की कमी को नहीं दिखाता, बल्कि स्पष्ट रूप से भाई-भतीजावाद का उदाहरण है। यदि अधिकारियों के परिवार के सदस्य इस तरह से नियमों को ताक पर रखकर काम कर सकते हैं, तो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के पालन का क्या होगा?” कांग्रेस ने इस मामले को लोकायुक्त और उच्च न्यायालय के सामने ले जाने की चेतावनी भी दी है।
वहीं, इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतपाल महाराज ने कहा, “चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी थी और किसी भी प्रकार के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि, मैं विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए अपने बेटे सुयेश रावत से निवेदन करूंगा कि वह इस परियोजना से अपना नाम वापस ले लें। मैं हमेशा से पारदर्शिता में विश्वास रखता हूं और आगे भी इसका पालन करूंगा।”
इस मुद्दे पर बीजेपी ने भी अपना पक्ष रखते हुए मंत्री महाराज का बचाव किया। बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा, “यह आरोप राजनीतिक फायदे के लिए लगाए जा रहे हैं। अगर कोई उद्यमी सभी दिशा-निर्देशों का पालन कर रहा है, तो उसे संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है। हमारी पार्टी पारदर्शिता और नियमों के पालन में विश्वास रखती है।”
बीजेपी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है और जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी प्रक्रियाओं को नियमों के तहत संचालित कर रही है और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या भाई-भतीजावाद को बर्दाश्त नहीं करेगी।



