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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती नाम मात्र की होती है खेती न करने का मुख्य कारण जंगली सूअर व बंदर को माना जाता है यह हास्य पद विषय जरूर लगता है अधिकांश कहा जाता है की खेती करो तो दिन में बंदर फसल बर्बाद कर देता है और रात को जंगली सूअर फसलों को नुकसान पहुंचा देता है पहाड़ों में खेती करना संभव नहीं हो सकता जिसके चलते आज पहाड़ों में अधिकतर खेत बंजर हो रहे हैं लेकिन उत्तराखंड में कुछ ऐसे भी स्थान है जहां पर बंदर सुअरो की कहानी या बहाना नही बनाया जाता इस प्रकार से बहाने बाजी को दरकिनार की जाती है अव्वल दर्जे की खेती ।
जी हां आपको बता दे उत्तराखंड जौनसार बावर में एक स्थान जहां पर प्रत्येक सीजन हर महीने खेती की जाती है जिससे यहां पर आर्थिक स्थिति सबकी मजबूत है तथा अपने पूरे क्षेत्र को रोजगार से संपन्न बना रखा है आप सोचने का विषय यह है कि जहां पर एक तरफ पर्वतीय क्षेत्र में खेती के नाम पर जंगली सूअर बंदरों के आतंक का हवाला दिया जाता है तो वहीं जौनसार बावर के इन बहानों को दरकिनार कर खेती जोर शोर से की जाती है।




