Saturday, June 20, 2026
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​कोर्ट के आदेशों की SDO राजीव नयन नौटियाल को है फिकर ​DFO चकराता वैभव सिंह इस मुद्दे पर नहीं करना चाहते कोई ज़िक्र

​पहाड़ की दहाड़ न्यूज़

20 जून 2026

​देहरादून जनपद के कालसी और विकासनगर क्षेत्र से होकर गुजरने वाली आसन नदी में हो रहे अवैध खनन के मामले ने अब अत्यंत गंभीर मोड़ ले लिया है।पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ के साथ अपने एक्सक्लूसिव साक्षात्कार (भाग-2) में SDO राजीव नयन नौटियाल ने चौकाने वाले खुलासे किए हैं।

​SDO नौटियाल लगातार न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर DFO चकराता वैभव सिंह को संयुक्त स्थलीय निरीक्षण के लिए बुला रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि DFO चकराता यह तर्क देकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि वह इलाका SDO के कार्यक्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता है।कोर्ट के आदेशों की SDO राजीव नयन नौटियाल को है फिकर, लेकिन DFO चकराता से लेकर मुख्यालय तक इस मामले पर आखिर क्यों नहीं कर रहे हैं कोई जिक्र? यह ‘अधिकार क्षेत्र’ का बहाना बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की बड़ी साजिश लग रही है।

 

​आज की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

​अधिकार क्षेत्र का बहाना अवैध खनन को रोकने के बजाय DFO द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि यह क्षेत्र SDO के अधिकार में नहीं है। SDO नौटियाल दस्तावेजों के साथ यह साबित करने में जुटे हैं कि वह क्षेत्र उनके ही कार्यक्षेत्र का हिस्सा है ताकि वे वहां हो रही लूट को रोक सकें।

2 ​जान को खतरा और सुरक्षा की गुहार SDO राजीव

नयन नौटियाल ने स्पष्ट कहा है कि माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद से उनकी जान को खतरा है। उन्होंने डीजीपी और वन मुख्यालय से सुरक्षा की मांग की है, लेकिन उन्हें अब तक उचित सहयोग क्यों नहीं दिया जा रहा है?

3 ​निरीक्षण से परहेज़ SDO द्वारा बार-बार पत्र लिखने के बावजूद DFO का मौके पर न जाना विभागीय ढिलाई का स्पष्ट प्रमाण है।

 

 

4 ​पेट्रोलिंग फंड पर रोक: गश्त के लिए जरूरी फंड जारी न करना, एक ईमानदार अधिकारी के काम में बाधा डालने की सोची-समझी कोशिश है।

 

5 ​कोर्ट के आदेशों की अनदेखी जब मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश जारी हो चुके थे तब भी चकराता प्रभाग द्वारा इन आदेशों का पालन न करना न्यायालय की अवमानना जैसा है।

पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ के पास मौजूद वह दस्तावेज़ (पत्र संख्या 3356 / 29-1) जो विभाग की लापरवाही की पोल खोल रहा है।

 

​मुख्यालय से सवाल

आखिर DFO चकराता से लेकर वन मुख्यालय तक इस मामले में इतनी गहरी चुप्पी क्यों है? क्या 350-400 करोड़ रुपये की सालाना राजस्व चोरी देखकर भी जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं?

​प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) आर.के. मिश्रा इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। क्या जाते-जाते वे एक सच्चे वन प्रहरी के रूप में अपना कर्तव्य निभाएंगे या अधिकार क्षेत्र का यह विवाद सुलझाने के बजाय वे भी माफियाओं को संरक्षण देना ही अपना अंतिम लक्ष्य मानेंगे?

​महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ हमेशा निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध है और यह खबर SDO राजीव नयन नौटियाल द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर आधारित है।

यदि वन मुख्यालय से HoFF आर.के. मिश्रा या DFO चकराता वैभव सिंह अपना पक्ष रखना चाहते हैं तो हम उन्हें आमंत्रित करते हैं।

बस उन्हें हमें समय देना होगा। पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ निष्पक्षता के साथ उनके पक्ष को भी प्रमुखता से जनता के सामने रखेगा।

​पहाड़ की दहाड़ न्यूज़ डिजिटल एंड पोर्टल न्यूज़ चैनल को है आपके जवाब का इंतज़ार। यह है हमारी इस मुहिम का भाग-2।

 

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