🕵️♂️ नीलकंठ कांवड़ मेला खोया-पाया केन्द्र: जहाँ बिछड़े मिलते हैं, और मिलती है मुस्कुराहट।
🔶 जहां हर बिछड़ाव 👨👩👧👦 का अंत मिलन से हो, कांवड़ यात्रा में खोया-पाया केंद्र बना श्रद्धालुओं का सहारा।
कांवड़ मेला के दौरान पौड़ी पुलिस द्वारा अब तक कुल 483 गुमशुदाओं को उनके परिजनों से मिलाकर चेहरों पर लौटायी मुस्कान।
पहाड़ की दहाड़ न्यूज

श्रावण मास की विशाल कांवड़ यात्रा में, जहाँ आस्था का सैलाब उमड़ता है, वहीं कभी-कभी भीड़ के बीच कोई अपनों से बिछड़ जाता है, तो कभी किसी का जरूरी सामान गुम हो जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षणों में खोया-पाया केंद्र श्रद्धालुओं के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आया। इस कांवड़ यात्रा के दौरान अब तक लगभग 62 लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा श्री नीलकंठ महादेव में दर्शन किये हैं। इस अत्यधिक भीड़ के दौरान 483 श्रद्धालु जिनमें अधिकांश बच्चे थे वे अपने परिजनों से बिछड गये थे जिन्हें कांवड़ मेला के दौरान स्थापित 06 खोया-पाया केन्द्रों में नियक्त कर्मियों द्वारा लगातार अनाउंसमेंट कर,व्हटसअप ग्रुप में फोटो भेजकर,गांवों से परिजनों का पता लगाकर व आपसी तालमेल से बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को सकुशल उनके परिजनों से मिलाया गया।

👣 कहीं एक मासूम बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया था🎒 तो कहीं किसी श्रद्धालु का पर्स, मोबाइल या अन्य जरूरी सामान गुम हो गया था, लेकिन हर बार खोया-पाया केंद्र ने जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ उन सभी को उनके अपनों और सामान से मिलाया।
इसी क्रम में दिनांक 22.07.2025 को हरियाणा निवासी नानू रास्ते में परिजनों स बिछड़ गया था,बिहार निवासी सौरभ, दिल्ली निवासी कृष्णा, मनप्रीत निवासी पंजाब, 10 वर्षीय भोला निवासी सहारनपुर उत्तर प्रदेश व बुजुर्ग संतोष कुमार पांडेय निवासी गाजीपुर उत्तर प्रदेश यह सभी श्रद्धालु किसी कारणवश अपने परिजनों से बिछड़ गये थे जिन्हें खोय़ा-पाया केन्द्र जानकी झूला में तैनात पुलिस कर्मियों के सफल प्रयासों के फलस्वरूप एकाएक उनके परिजनों से मिलाया गया।
📍 पौड़ी पुलिस के यह केंद्र न सिर्फ सूचना देने का माध्यम बने, बल्कि सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लौटाने का माध्यम भी रहे।



