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राज्य की विकास योजनाओं को लेकर उत्तराखण्ड सरकार ने तेज़ किए कदम, सेतु आयोग की बैठक में 2050 तक का विज़न डॉक्यूमेंट तैयार करने के निर्देश
उत्तराखण्ड राज्य के भविष्य को लेकर सरकार ने गंभीरता से काम शुरू कर दिया है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और भविष्य के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं। राज्य के 50 वर्ष पूरे होने पर 2050 तक की समग्र योजना का ब्लूप्रिंट तैयार करने पर जोर दिया गया है, ताकि उत्तराखण्ड को एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, सचिवालय में आयोजित सेतु आयोग की नीतिगत निकाय की पहली बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि राज्य स्थापना की 50वीं वर्षगांठ (वर्ष 2050) को ध्यान में रखते हुए एक विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किया जाए। यह दस्तावेज़ राज्य की ज़मीनी ज़रूरतों और ठोस आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए, जिससे योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू की जा सकें।
बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया कि विकास योजनाओं को तीन हिस्सों में विभाजित किया जाए:
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अल्पकालिक योजना (2 वर्ष) — तात्कालिक समस्याओं के समाधान हेतु।
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मध्यकालिक योजना (10 वर्ष) — स्थिर और निरंतर विकास के लिए।
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दीर्घकालिक योजना (25 वर्ष) — 2050 तक के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए।
इसके अलावा बागवानी और डेयरी जैसे क्षेत्रों में छिपी संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में भी विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए। इन क्षेत्रों को भविष्य के आर्थिक स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रवासी उत्तराखण्डियों को राज्य की विकास यात्रा से जोड़ा जाए, ताकि वे राज्य में निवेश कर सकें और अपनी जन्मभूमि के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकें। इस दिशा में विशेष नीति तैयार की जाएगी, जिससे राज्य से बाहर रह रहे उत्तराखण्डी भावनात्मक और आर्थिक रूप से राज्य से जुड़ सकें।



