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जनसेवा और ज़मीनी सख़्ती पर मुख्यमंत्री धामी का ज़ोर: सड़क-बिजली-पानी, चारधाम यात्रा और अवैध मदरसों पर जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश

आप को बता दे

 दिनांक: 07 अप्रैल 2025
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ज़ोर: सभी जिलों में सड़क, बिजली, पानी पर कड़ी निगरानी; चारधाम यात्रा, अतिक्रमण और मदरसा जांच पर चलेगा विशेष अभियान

देशभर में शासन प्रणाली को जनहित की ज़रूरतों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। जब जनता की समस्याएँ बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे मूलभूत मुद्दों से जुड़ी हों, तब स्थानीय प्रशासन की सतर्कता और सक्रियता सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी बन जाती है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और धार्मिक महत्व वाले राज्य में, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं और मानसून में आपदा का ख़तरा बना रहता है, वहां प्रशासनिक तैयारी और ज़मीनी निगरानी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

इसी कड़ी में सोमवार को आयोजित प्रातः कालीन बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिले में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य, बिजली और पेयजल आपूर्ति जैसी ज़रूरी सेवाओं की सतत निगरानी की जाए तथा इनसे जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान और सुधारात्मक कार्यवाही प्राथमिकता पर हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ज़िला प्रशासन को आम जनता से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने विशेष रूप से 1905 और 1064 जैसे शिकायत पोर्टलों पर प्राप्त जनसमस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

धामी ने चारधाम यात्रा मार्ग को विशेष प्राथमिकता में शामिल करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने मार्गों की स्थायी निगरानी, वनाग्नि की रोकथाम, बरसाती नालों की सफाई, और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने अवैध अतिक्रमण और अवैध मदरसों पर सख़्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभागीय कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, डाटा का सत्यापन, और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को तेज़ किया जाए।

धामी के अनुसार, प्रदेश में “गवर्नेंस” अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम जनता को उसकी सीधी अनुभूति होनी चाहिए — और यही प्रशासन की असली कसौटी है।


 

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