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उत्तराखंड में अवैध खनन पर टकराव: पूर्व मुख्यमंत्री बोले- हो रहा है खनन, खनन सचिव ने किया इनकार
खनन का प्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ता है, बल्कि इससे जल स्रोतों की हानि, भू-स्खलन, और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुंचती है। अवैध खनन से सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान होता है और यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इसी मुद्दे को लेकर उत्तराखंड में बड़ा विवाद सामने आया है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लोकसभा में अवैध खनन का मुद्दा उठाने के बाद खनन विभाग के सचिव ने साफ तौर पर इसे झूठा करार दिया है।
मामला यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 27 मार्च को लोकसभा में आरोप लगाया कि उत्तराखंड में अवैध रूप से खनन हो रहा है। वहीं, खनन सचिव बृजेश कुमार संत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में किसी भी तरह का अवैध खनन नहीं हो रहा है और यह पूरी तरह निराधार, भ्रामक और असत्य है। दूसरी ओर, सांसद का कहना है कि राज्य में खनन जारी है और इसकी सटीक जानकारी जनता से ही मिल सकती है।
अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार के दो अलग-अलग पदों पर बैठे लोग विपरीत बयान दे रहे हैं, तो सच क्या है? क्या अवैध खनन वास्तव में हो रहा है, या यह किसी राजनीतिक मुद्दे का हिस्सा मात्र है? इस पर जनता की राय महत्वपूर्ण होगी। जनता से अपील की जा रही है कि यदि उन्हें इस संबंध में कोई ठोस जानकारी है, तो उसे सामने लाएं ताकि सच उजागर हो सके।




