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उत्तराखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने इस्तीफा दिया, बजट सत्र में दिए गए बयान के बाद उठा विवाद
देश में राजनीतिक बयानबाजी अक्सर चर्चा का विषय बनती है, लेकिन जब कोई बयान संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा हो, तो यह बड़े विवाद का रूप ले सकता है। हाल ही में उत्तराखंड में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को अपने बयान के कारण भारी विरोध का सामना करना पड़ा। फरवरी में राज्य के बजट सत्र के दौरान उनके बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी, जिससे कई संगठनों और दलों ने कड़ा विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने 16 मार्च 2025 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजट सत्र के दौरान प्रेमचंद अग्रवाल ने एक टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने सवाल किया कि क्या उत्तराखंड केवल पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए है? इस बयान पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे राज्य की सामाजिक एकता पर सवाल उठाने वाला बताया। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद, प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने बयान पर खेद जताया और कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे गलतफहमी पैदा हुई। हालांकि, बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना यह होगा कि उत्तराखंड सरकार इस रिक्त पद को भरने के लिए क्या कदम उठाती है और इस प्रकरण का आगामी चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।



