“भिक्षा नहीं, शिक्षा”: देहरादून बना नजीर, 200 बच्चों को मिला नया जीवन, मुख्यमंत्री का सपना साकार!

विस्तार: देहरादून जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के भिक्षावृत्ति मुक्त उत्तराखंड के सपने को साकार करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान के तहत, सितंबर 2024 से अब तक लगभग 200 बच्चों को भिक्षावृत्ति के दलदल से निकालकर उन्हें शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अवसर प्रदान किया गया है।
प्रशासन ने केशव पुरी बस्ती, डोईवाला और लक्ष्मण सिद्ध मंदिर जैसे स्थानों से भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को रेस्क्यू किया। इन बच्चों को मेडिकल परीक्षण और जीडी के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें राजकीय शिशु सदन और समर्पण (खुला आश्रय) में भेजा गया।
जिला प्रशासन ने शहर में गश्त के लिए एक विशेष वाहन और चौराहों पर 12 होमगार्ड तैनात किए हैं,
जो बच्चों को रेस्क्यू करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
रेस्क्यू किए गए बच्चों को आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर में रखा गया है, जहां उन्हें निजी स्कूलों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संगीत, कला, कंप्यूटर ज्ञान और खेल जैसी गतिविधियों में भी शामिल किया जा रहा है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस अभियान को बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य देहरादून को भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाना है।
बतातें चलें: देहरादून को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए डीएम और सीडीओ के द्वारा अभिनव पहल की जा रही है।
आधुनिक केयर शेल्टर में निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं हैं। बच्चों को शिक्षा के साथ संगीत, चित्रकला, कंप्यूटर ज्ञान और खेल से जोड़ा जा रहा है।



